वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

वायु प्रदूषण नियंत्रण के तहत पराली जलाने पर रोक लगाने के साथ ही अब प्रशासन ने प्रदूषण फैलाने वाले गुड़ कोल्हुओं पर भी सख्ती शुरू कर दी है। जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निर्देश पर मंगलवार को उपजिलाधिकारी गोला प्रतीक्षा त्रिपाठी के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने जलालपुर, सिकंदराबाद सहित आसपास के गांवों में कोल्हुओं पर व्यापक छापेमारी की।
सहायक पर्यावरण अभियंता, खाद्य सुरक्षा अधिकारी और खाण्डसारी निरीक्षक की संयुक्त टीम ने लगभग 100 कोल्हुओं का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि अधिकांश कोल्हू डीजल इंजन से संचालित थे, जिनकी चिमनियाँ केवल 4–5 मीटर ऊँची थीं और वेट स्क्रबर जैसी प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था पूरी तरह नदारद मिली।
इसी कारण चिमनियों से काले धुएँ और राख की शिकायतें सही पाई गईं। अधिकांश कोल्हुओं में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति (NOC) भी नहीं मिली, जो सीपीसीबी की 13 अगस्त 2019 की गाइडलाइन और वायु (प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम 1981 का उल्लंघन है। टीम ने यह भी पाया कि संचालकों ने न तो रजिस्टर बनाया था, न बोर्ड लगाया था और न ही आवश्यक साफ-सफाई रखी थी। राब/गुड़ के कंटेनर भी गंदे पाए गए।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने मौके पर ही लाइसेंस लेने, साफ कंटेनरों का उपयोग करने और किसी भी प्रकार के रंग/केमिकल के पूर्ण प्रतिबंध के निर्देश दिए। गंभीर कमियाँ पाए जाने पर 5 कोल्हू तत्काल प्रभाव से बंद करा दिए गए, जिनमें वसीम अहमद उर्फ़ मुन्ना (जलालपुर), मनोज कुमार (जलालपुर), मोहसीन (जलालपुर), विनीत कुमार (सिकंदराबाद) और कनौजी (सिकंदराबाद) के कोल्हू शामिल हैं।
इसके बाद तहसील सभागार में कोल्हू संचालकों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें उपजिलाधिकारी प्रतीक्षा त्रिपाठी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हर कोल्हू में वेट स्क्रबर और 10 मीटर ऊँची चिमनी अनिवार्य रूप से लगानी होगी। सभी व्यवस्थाएँ एक सप्ताह के भीतर दुरुस्त करने का अल्टीमेटम दिया गया।
एसडीएम प्रतीक्षा त्रिपाठी ने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा में सुधार नहीं हुआ तो कोल्हू संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। संचालकों ने समय पर सभी मानकों को पूरा करने का आश्वासन दिया, जबकि प्रशासन ने दो-टूक कहा कि अगली जांच में गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई और भी सख्त होगी।
