ग्राम पंचायत झिन्ना में विकास कार्य ठप होने पर सरपंच और ग्रामीणों का आमरण अनशन जारी, शासन-प्रशासन और सांसद गणेश सिंह पर लगाए आरोप | New India Times

मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:

ग्राम पंचायत झिन्ना में विकास कार्य ठप होने पर सरपंच और ग्रामीणों का आमरण अनशन जारी, शासन-प्रशासन और सांसद गणेश सिंह पर लगाए आरोप | New India Times

मैहर जिले के अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत झिन्ना में विकास कार्यों के न होने से आक्रोशित होकर ग्राम सरपंच कोमल चंद्र चौरसिया, पंच और ग्रामीणजन गांधी चौक झिन्ना में आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। यह अनशन आज तीसरे दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों और सरपंच का आरोप है कि शासन की मंशा के अनुरूप ग्राम पंचायत के विकास और ग्रामवासियों की खुशहाली हेतु जनभागीदारी से लगभग 5 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। इसके अंतर्गत 100 हाट बाजार की दुकानें, सार्वजनिक मैरिज गार्डन, दो सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण तथा पूरे ग्राम का सौंदर्यीकरण प्रस्तावित था।

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उन्होंने बताया कि वर्ष 2012-13 से अब तक कलेक्टर सतना और कलेक्टर मैहर को सात बार आवेदन दिए गए हैं, ताकि ग्राम पंचायत झिन्ना की शासकीय आराजी क्रमांक 197, 113/2, 583, 626, 846/1 के अंश भागों को ग्राम पंचायत को विकास कार्यों के लिए हस्तांतरित किया जाए। इसके अलावा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अमरपाटन को 13 आवेदन तथा नायब तहसीलदार ताला को 70 से 80 आवेदन दिए जा चुके हैं, परंतु किसी भी स्तर पर कार्यवाही नहीं की गई।

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ग्रामीणों का आरोप है कि सांसद सतना गणेश सिंह अपने स्वजातीय रिश्तेदार सत्येंद्र सिंह (पूर्व सरपंच) के भ्रष्टाचार को बचाने के प्रयास में ग्राम विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं। सांसद द्वारा कलेक्टर मैहर और जिला पंचायत सतना को दो पत्र भेजे गए, जिनमें सत्येंद्र सिंह के पक्ष में सिफारिश की गई थी। यहाँ तक कि 25 फरवरी 2013 को सांसद द्वारा लोकायुक्त आईजी भोपाल को भी पत्र भेजा गया था, जिसमें सत्येंद्र सिंह को निर्दोष बताया गयाना।

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हालांकि, जांच के बाद लोकायुक्त न्यायालय ने सत्येंद्र सिंह (पूर्व सरपंच) और सचिव दीपक चौरसिया को दोषी पाते हुए 5 वर्ष की सजा सुनाई थी। इन सब कारणों से ग्राम पंचायत झिन्ना में विकास कार्य ठप पड़े हुए हैं और प्रशासन द्वारा सरपंच के सभी आवेदन ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं।

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ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पंचायत मंत्री भोपाल, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, मानवाधिकार आयोग दिल्ली तथा आयुक्त रीवा को 23 सितंबर 2025 को आवेदन देकर कहा था कि यदि 15 दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। अब अनशन के तीसरे दिन ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप कर समाधान नहीं करते, तब तक आमरण अनशन अनवरत जारी रहेगा।

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