मुंबई कुणाची ? मराठी अस्मिता की मशाल जलाने वाले कॉमरेड को याद कर रही हर धारा | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

मुंबई कुणाची ? मराठी अस्मिता की मशाल जलाने वाले कॉमरेड को याद कर रही हर धारा | New India Times

1917 रशियन समाजवादी व्यवस्था के मुरीद और पूंजीवाद के कट्टर विरोधी कॉमरेड अन्ना भाऊ साठे को आज उनकी जयंती पर राइट विंग वाले भी पूज रहे है। 1 अगस्त 1920 सांगली के वाटेगांव मे जन्मे अन्ना भाऊ पिता सिधोजी के साथ मुंबई आए सायन अस्पताल के लेबर कैंप मे मजदूर नेता के एम सालवी , शंकर नारायण पगारे, आर बी मोरे के प्रभाव मे पढ़े लिखे। 1939 को स्पेन की तानाशाही नाम का पोवाड़ा शब्दबद्ध किया। 1961 में रशिया दौरे पर गए तब अन्ना ने एक सफरनामा लिखा। 1944 में शाहीर अमर शेख , द .ना गवानकर के साथ मिलकर लाल बावटा कला मंच बनाया। 1946 ब्रिटिश प्रांत परिषद चुनाव मे कम्युनिस्ट प्रत्याशी का प्रचार करने चांदूर बाजार पहुंचे लाल बावटा को पुलिस ने डकैती के झूठे मामले में गिरफ़्तार किया।

मुंबई कुणाची ? मराठी अस्मिता की मशाल जलाने वाले कॉमरेड को याद कर रही हर धारा | New India Times

इसी साल अन्ना भाऊ ने देशभक्त घोटाले नाम से लोक नाटक लिखा। सुभाष चंद्र बोस आजाद हिंद फौज सेनानियों के गिरफ्तारी के ख़िलाफ़ ब्रिटिश नौसेना के भारतीय मुलाजिमों ने 18 से 22 फ़रवरी 1946 के बीच सरकार के ख़िलाफ़ बगावत कर दी। इस आंदोलन के लिए अन्ना भाऊ ने जनता का समर्थन जुटाया। 1949 Indian People Theater Social Association के सदस्य बने कॉमरेड साठे ने 35 चरित्र 13 कथा 07 नाटक लिखे जिनका 22 भाषाओं में अनुवाद किया गया है। 1958 भारत के पहले दलित साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष अन्ना भाऊ ने सामाजिक आर्थिक रूप से शोषित वर्ग को दलित कहा। 1955 – 60 मुंबई समेत संयुक्त महाराष्ट्र राज्य निर्माण आंदोलन मे लाल बावटा कूद पड़ा। अन्ना भाऊ साठे , अमर शेख , द . ना गवानकर ने पूरे महाराष्ट्र में भाषिक अस्मिता की मशाल जलाई।

युगांतर , लोकयुद्ध ,  मशाल जैसे अखबारो में अन्ना बतौर पत्रकार लिख रहे थे। लाल बावटा ने “मुंबई कुणाची” इस लोक नाटिका के हजारों प्रयोग किए। माझी मैना गांवा कड़े राहिली इस गीत ने महाराष्ट्र के मराठी समाज के मन में आग लगा दी। प्रबोधनकर केशव सीताराम ठाकरे , डॉ बाबा भीमराव आंबेडकर , प्र के अत्रे कॉ श्रीपाद डांगे , एस एम जोशी संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के सभी समाजवादी लेफ्ट नेताओ ने अन्ना भाऊ के योगदान को सराहा। अन्ना भाऊ पूंजीवाद और पूंजीवादी व्यवस्था के घोर आलोचक रहे। आजादी के 75 साल बाद भारत को लोकतंत्र के रास्ते पूंजीवाद की ओर ले जाया जा रहा है। मराठी भाषी महाराष्ट्र पर मनुवाद को जबरन लादने के लिए वर्चस्ववादी सांस्कृतिक सोच हिंदी भाषा को हथियार बनाकर इस्तेमाल कर रही है।

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