मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:

मामला धर्म नगरी मैहर माँ के धाम शारदा देवी मंदिर से जुड़ा है,जहाँ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के निराकरण के लिए, माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा,आयुक्त रीवा को निर्देशन अधिकारी नियुक्त किए जाने से प्रकाश में आने व जन मानस के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कथित मामला, माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में पेश जनहित याचिका के प्रकाश आने से जन चर्चा का विषय बन गया, जहां याचिका के माध्यम से माँ शारदा देवी मंदिर प्रबंध समिति मैहर में,अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन में की गई प्रशासनिक लापरवाही को दर्शित कर समुचित जांच व निराकरण करने के लिए, पेश की गई।
वहीं माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा शिकायत के परीक्षण उपरांत,उसे निराकृत के लिए आयुक्त रीवा को निर्देशन अधिकारी नियुक्त करते हुए, जनहित याचिका के आक्षेपित बिंदुओं के निराकृत करने का निर्देश दिया गया थे। प्राप्त निर्देशों की पूर्ति के लिए आयुक्त रीवा द्वारा, माँ शारदा देवी मंदिर प्रबंध समिति मैहर को शिकायती पत्र प्रेषित कर बिंदुबार जानकारी मांगी गई, जिसपर समिति प्रशासक द्वारा,आयुक्त रीवा से प्राप्त शिकायती पत्र पश्चात, शिकायत के निराकरण के लिए, जॉच टीम का सहारा लेकर, भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए, मिथ्या जॉच रिपोर्ट तैयार कराई जाकर भ्रष्टाचार को नियमबद्ध कर,आयुक्त रीवा को जॉच रिपोर्ट सहित प्रतिवेदन प्रेषित कर शिकायत को मिथ्या बताया गया था।
प्रशासक की रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात,आयुक्त रीवा द्वारा,जब उक्त रिपोर्ट को, अधिनियम से परीक्षण किया, तो उस पेश रिपोर्ट के परीक्षण से यह तत्व पूर्णतः प्रमाणित हो गया कि प्रशासक द्वारा व्यापक फर्जी बाड़े को संरक्षण देते हुए, गलत जॉच रिपोर्ट का सहारा लेकर, अनियमितता को वैधानिकता देने का प्रयास,अपनी प्रेषित जानकारी में किया गया है। आयुक्त रीवा द्वारा, रिपोर्ट के परीक्षण उपरांत,प्रशासक द्वारा प्रेषित रिपोर्ट को,अनियमित मानकर आक्षेपित किया गया,जिसका मुख्य कारण व्यापक अधिनियम की अनियमितता एवं भ्रष्टाचार को माना था। आयुक्त रीवा के समक्ष हुए खुलासे से, तत्वों के स्पष्ट स्पष्टीकरण व अनियमितता से समिति को हुए छती व दोषी व्यक्ति की जवाबदेही सहित,अन्य तत्वों के स्पष्टीकरण के लिए,आयुक्त रीवा द्वारा संपूर्ण तथ्यों के भौतिक परीक्षण के लिए अपने मातहत कर्मचारियों की एक टीम गठित कर जॉच की जिम्मेवारी सौंपी गई थी।
गठित जॉच टीम की रिपोर्ट प्राप्त होने के पश्चात, प्रकरण निराकरण हेतु,आयुक्त के समक्ष जब प्रकरण, संलग्न दल की जॉच रिपोर्ट के साथ पेश हुआ,तो मामले में प्राप्त जॉच दल की जॉच रिपोर्ट देख कर,आयुक्त रीवा के पैर के नीचे से जमीन खिसक गई, क्योंकि जॉच दल की जॉच रिपोर्ट में जहां अधिनियम को शून्य बताते हुए अधिनियम की व्यापक अनियमितता बताई गई,वहीं करोड़ों नहीं,अरबों, खरबों के घोटाले,का पर्दाफाश उस रिपोर्ट में किया गया था,जहां नियम विरुद्ध तरीके से, मनमानीपूर्ण कार्य किए जाने का खुलासा, जॉच रिपोर्ट में किया गया था, वहीं नियमो की व्याख्या कर उसको प्रमाणित भी किया गया था।
सूत्र बताते हैं कि,आयुक्त रीवा द्वारा,समय से याचिका के आक्षेपित बिंदुओं का निराकरण न कर, जाँच दल से प्रशासक की रिपोर्ट को वैधानिक किए जाने मे यदि कोई गुंजाइश हो,उसे पूर्ण करने का दबाव बनाया गया,जिससे मूल याचिका के निराकरण किया जा सके?किंतु समय से मूल याचिका का निराकरण न होने से,माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में,अवमानना याचिका के प्रचलन मे आ जाने से,आयुक्त रीवा के ऊपर शीघ्र, मूल याचिका के शिकायती पत्रों का निराकरण किए जाने का अतिरिक्त दबाव बन गया,फलत प्रचलित अवमानना याचिका में, आयुक्त रीवा द्वारा समय पे समय लेकर अभी तक याचिका के निराकरण को टाला गया है।जिसका प्रमुख कारण मामले में प्राप्त जॉच रिपोर्ट को प्रशासक द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के समतुल्य न हो पाना माना गया है।
समाचार लिखे जाने तक, सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, “बीते दिन,प्रशासक सहित समिति के चंद जयचंदों द्वारा जांच टीम से गुप्त चर्चा कर मामले को रफा दफा किए जाने की सहमति,साम दाम व राजनैतिक दबाव देकर किए जाने की कि गई है”। यह चर्चा का परिणाम क्या हुआ,यह अभी गुप्त है लेकिन चंद दिन में,माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में अवमानना मामले में स्टेट्स रिपोर्ट पेश किए जाने से चर्चा के परिणाम स्पष्ट हो जावेगा, तदोपरांत ऊट किस करवट बैठता है,यह विषय तब तक के लिए इंतजार का विषय है।
