आपले सरकार केंद्रों के बाहर "रेट बोर्ड" क्यों नहीं लगाए जा रहे है? प्रशासन खामोश | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

आपले सरकार केंद्रों के बाहर "रेट बोर्ड" क्यों नहीं लगाए जा रहे है? प्रशासन खामोश | New India Times

क्रीमीलेयर, राष्ट्रीयता, नॉन क्रीमीलेयर, निवासी, इनकम, हलफनामा, पैन कार्ड, आधार कार्ड संशोधन, जाती प्रमाणपत्र, ऑनलाइन 7/12, राजस्व से जुड़ी प्रमाणित दस्तावेजी जानकारी की डिजिटल प्रतियां, कृषि विभाग से संबंधित योजनाएं तमाम सरकारी सुविधाओ के लिए 20 रुपए से लेकर 50 रुपए के अंदर फीस दे कर सेवा पाने का नागरिकों का अधिकार प्रशासन ने ख़त्म कर दिया है। समूचे महाराष्ट्र में कहीं भी चले जाइए किसी भी आपले सरकार सेवा केंद्र के बाहर आपको सेवा शुल्क बोर्ड नज़र नही आएगा। रेट बोर्ड नहीं होने के कारण गरीब लोगों को पता नहीं चलता कि किस कागज के लिए केंद्र चालक को कितना पैसा देना है। कोई गरीब रसीद नही मांगता और न हि कोई बेहद गरीब केंद्र चालक खुद हो कर किसी ग्राहक को रसीद देता है। गैर कानूनी तरीके से चलाए जा रहे सेवा केंद्रों की फेहरिस्त काफ़ी लंबी है।

सरकार ने जब से एक खिड़की योजना बंद करी है तब से ऑनलाइन के नाम पर राजस्व विभाग की मूक सम्मति से लूट खसोट और भ्रष्टाचार की ऐसी व्यवस्था पैदा हो गई है जो जनता का आर्थिक शोषण कर रही है। इस सिस्टम को स्थानीय राजनीति का संरक्षण है। 25/35/50 रुपए के काम के लिए 100/200 रुपए वसूले जा रहे है। मीडिया में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के सदस्य पंजीकरण मुहिम की खबरे रिपोर्ट की जा रही है। जिलाधीश इस मामले का कोई संज्ञान लेंगे इसकी गारंटी इस लिए नहीं है क्यों कि तबादलों का सीजन नजदीक है। इन जर्जर हो चुके हालातों में आम जनता यही कर सकती है कि सेवा केंद्र से पक्की रसीद की मांग करें और रसीद के अनुसार हि भुगतान करें।

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