मुबारक अली, ब्यूरो चीफ, शाहजहांपुर (यूपी), NIT:

शाहजहांपुर जिला में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ख़िलाफ़ भारत बंद का कोई खास असर नहीं दिखा।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमीलेयर को लेकर फैसला सुनाते हुए कहा था कि सभी एससी और एसटी जातियां और जनजातियां एक समान वर्ग नहीं हैं, कुछ जातियां अधिक पिछड़ी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए – सीवर की सफाई और बुनकर का काम करने वाले, ये दोनों जातियां एससी में आती हैं लेकिन इस जाति के लोग बाकियों से अधिक पिछड़े रहते हैं। इन लोगों के उत्थान के लिए राज्य सरकारें एससी-एसटी आरक्षण का वर्गीकरण (सब-क्लासिफिकेशन) कर अलग से कोटा निर्धारित कर सकती हैं, ऐसा करना संविधान के आर्टिकल-341 के खिलाफ नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ भरता बंद का आह्वान किया गया था जिसमें सपा व बसपा सहित भीम आर्मी, भीमसेना एवं अन्य संगठनों द्वारा भारत बंद के आह्वान पर सैकड़ों लोग खिन्नी बाग राम लीला मैदान में एकत्रित हुए और जुलूस लेकर अंटा चौराह घंटा घर, बहादुर गंज होते हुए खिन्नी बंग चौराहा पर महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट प्रवेंद्र कुमार को सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया है कि बाबा साहब अंबेडकर भीमराव जी के अथक प्रयास से भारत के संविधान में अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग के लिए अनुच्छेद 340 की धारा 15/4 एक 16 बटे चार में स्पष्ट रूप से सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है आरक्षण की व्यवस्था 15 प्रतिशत अनुसूचित जाति एप्स 7.5 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति तथा 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए की गई है इसी के तहत इन वर्गों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाता है।
विगत 1 अगस्त 2024 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को आदेशित किया है कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति को मिलने वाले आरक्षण का राज्य सरकारी सर्वे कारण तथा इन जातियों में क्रीमी लेयर को छांटें और वर्गीकरण भी करें।
महोदया इस आदेश से अनुसूचित जाति एवं जनजातियों को काफी नुकसान होगा जातिगत आधार पर लोगों को लोगों में बंटवारा होगा, द्वेष भावना पैदा होगी फिर भी आरक्षण का लाभ पूर्ण रूप से इन जातियों को नहीं मिलेगा।
1. जातिगत जनगणना कराई जाए।
2. अनुसूचित जाति एक जनजातीय तथा अन्य पिछड़े वर्गों का आरक्षण कोटा सभी विभागों में पूरा किया जाए।
3. गैर सरकारी संस्थानों में भी आरक्षण व्यवस्था लागू की जाए।
4. जब तक अनुसूचित जाति जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण कोटा सभी विभागों में पूरा नहीं होता है तब तक आरक्षण के इस प्रावधान को संविधान की नौविक सूची में डाल दिया जाए ताकि आरक्षण प्रावधान में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ ना हो सके।

