नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

गठबंधन में अब हम (कांग्रेस) बड़ा भाई है, विधानसभा के लिए कांग्रेस 150 सीटों की मांग करेगी। प्रदेश कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले के इस बयान ने महाराष्ट्र भाजपा को बल दे दिया। MVA बैनर तले महाराष्ट्र में कांग्रेस को लोकसभा की 13, NCP (शरद पवार) 08, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) 09 सीटें मिली है। NCP और शिवसेना के जमीनी स्तर के संगठन की तुलना में कांग्रेस काफ़ी कमजोर है। पवार- ठाकरे के लिए बढ़ती सहानुभूति तथा भाजपा और देवेन्द्र फडणवीस के प्रती जनता के बीच व्याप्त असंतोष के कारण समाज के गरीब गुरबा मतदाता ने अपने वोट के दम पर बेजान कांग्रेस को नंबर 1 की पार्टी बनाया।
महाराष्ट्र में सितंबर-अक्टूबर में ने विधानसभा के आम चुनाव होने वाले है, MVA ने साझा प्रेस कांफ्रेंस करके सीट शेयरिंग जल्द पूरा करने की बात कही। प्रेस मीटिंग में पटोले के बयान को शीर्ष नेताओ ने कोई तरजीह नहीं दी। लेकिन पटोले की भूमिका ने 2014 के इतिहास के पन्नों को पलट दिया है। 2014 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष माणिकराव ठाकरे पर विधानसभा चुनाव में टिकट बेचने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। 288 नंबर में 44 सीटें लेकर कांग्रेस बुरी तरह से चुनाव हार गई।
जामनेर जैसी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को मात्र 2 हजार वोट मिले। महाराष्ट्र मे भाजपा 123, शिवसेना 63 सीटों के साथ युति सरकार बनी। आज दस साल बाद काफी कुछ बदल गया है, पटोले के सपने के मुताबिक अगर कांग्रेस अकेली लड़ी तो 40 के उपर नहीं जा सकेगी। ठाकरे – पवार मराठी अस्मिता को मुद्दा बनाकर प्रादेशिक स्तर पर चुनाव लड़ेंगे। लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की जनता ने MVA के प्रयोग पर मुहर लगा दी है। सितंबर – अक्टूबर में जम्मू कश्मीर, झारखंड, हरियाणा के साथ साथ महाराष्ट्र में चुनाव होने है। आपसी गुटबाजी यह कांग्रेस को लगी बेहद पुरानी बिमारी है। इंडिया गठबंधन की मज़बूती के लिए कांग्रेस को संगठन के तौर पर महाराष्ट्र में कड़े फ़ैसले लेने होंगे जैसे कि विधानसभा चुनाव के पहले पटोले को हटाकर तत्काल नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति कर देनी चाहिए।
इस पद के लिए पृथ्वीराज चव्हाण, अमित देशमुख, के सी पाडवी, यशोमती ठाकुर, मुकुल वासनिक, भाई जगताप यह नाम प्रभावी माने जा रहे है। महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव काफ़ी हद तक मानसून की बारिश पर निर्भर है सूखा पड़ता है तब भी और हेवी रेन से नुकसान होता है तब भी इन दोनों मामलों में भाजपा को वर्तमान 105 में से कम से कम चालीस सीटों का घाटा उठाना पड़ेगा। MVA को पसंद करने वाले संविधान प्रेमी चाहते हैं कि समय रहते पटोले के मसले को नई नियुक्ति से सुलझा लिया जाए।
