मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

दारूस सुरूर बुरहानपुर की उर्दू शायरी के अहम सुतून माने जाने वाले बुज़ुर्ग उस्ताद शायर मोहम्मद हारून अयाज़ क़ादरी (70) भी क़ज़ाऐ इलाही से कल दाग़ ए मफारेगत दे गए। बुनकर खानदान में जन्मे और लूम चलाकर अपनी शायरी को परवान चढ़ाने वाले इस शायर के कई शेरों ने उनको अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मकबूलियात अता की। दोहा कतर से बुरहानपुर आमद पर शायर अज़ीज़ नबील ने पहली मुलाक़ात में उनका यह शेर उन्हें नज़र करके हैरत में डाल दिया था कि: भूख का लुत्फ अमीरों के मुकद्दर में कहां। यह हसीना किसी क़ालीन पे चलती ही नहीं। महाराष्ट्र के जलगांव में एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान उनका इंतेक़ाल हो गया। उनका नआतिया मजमूआ “तोशाऐ आखिरत” के नाम से शाया हुआ है। मरहूम का जनाज़ा उनके निवासित मकान बस्ती हज़रत निज़ामुद्दीन, आज़ाद नगर बुरहानपुर से दोपहर 1:30 बजे उठाया गया। मस्जिद चुप शाह आज़ाद नगर बुरहानपुर में जनाज़े की नमाज़ उनके भतीजे एवं बुरहानपुर की बांस वाली मस्जिद के पेश इमाम हज़रत क़ारी मोहम्मद आकिल हबीबी ने अदा फरमाई। दाई अंगा कब्रिस्तान हमीदपुरा बुरहानपुर में मरहूम को हजारों सोगवारों की मौजूदगी में सुपुर्द ए खाक किया गया। बुरहानपुर की तमाम अदबी तंजीमों के जिम्मेदारॉन ने इनकी रुखसती को उर्दू ज़बान ओ अदब का गहरा नुकसान बताकर तआज़ियत पेश की है। अल्लाह मरहूम की मगफिरत फरमाए उन्हें माहे रमज़ान की बरकत के सदके में जन्नतुल फिरदौस में आला से आला मक़ाम अता फरमाए और घर परिवार, दोस्त एहबाब को इस सदमे को बर्दाश्त करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन। मरहूम के ईसाले सवाब के लिए सोमवार 03/04/2023 को सुबह 10:00 बजे मदरसा गौसिया हबीबिया, इतवारा गेट के बाहर हजरत शाह रोड पर कुरआन खानी का एहतमाम किया गया है।
