रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

गर्मी में प्यासे कंठ को तर करने के लिए प्याऊ तो कई लोग लगाते हैं ,लेकिन मूक पक्षियों की कोई सुध नहीं लेता।
जैन सोशल ग्रुप ने इस दिशा में पहल करते हुए घर-घर सकोरे बांटने का अभियान छेड़ा है अब तक डेढ़ सौ सकोरे वितरित भी किए जा चुके हैं। फिलहाल 300 सकोरे बांटने का लक्ष्य है। जरूरत के अनुसार लक्ष्य को बढ़ाया जाएगा गौरतलब है कि गर्मी के दौरान हर साल हजारों पक्षी प्यास के कारण मर जाते हैं इस स्थिति को देखते हुए जैन सोशल ग्रुप के सदस्यों ने अपनी ओर से लोगों को सकोरे देने का निर्णय लिया अभियान को मूर्त रूप देने के लिए खास तौर से सकोरे तैयार करवाए। प्रत्येक सकोरे में आधा लीटर पानी आ जाता है।
ग्रुप के सभी सदस्यों के साथ ही अन्य लोगों को भी सकोरे वितरित किए गए साथ ही लोगों से आह्वान किया कि वे अपने घर की छत या दीवार पर इन पात्रों में पानी भरकर जरूर रखें, ताकि गर्मी में पंछी अपनी प्यास बुझा सकें। इस अभियान में ग्रुप की सुनीता बाबेल की अहम भूमिका रही है। जैन सोशल ग्रुप द्वारा पक्षियों को पानी पिलाने के लिए घर-घर सकोरे बांटे जा रहे हैं।
आप भी अपने स्तर पर ये कर सकते हैं
● पक्षियों के पानी के लिए जो बर्तन रखें वह ज्यादा गहरे न हों, साथ ही इनके किनारे भी ज्यादा तीखे या कठोर न हों, जिससे इनके पंख व अंग घायल होने से बच सकें।
● इन बर्तनों को साफ करते रहें, ताकि गंदगी जमा न हो।
● रोजाना पानी जरूर बदलें।
● बर्तन ऐसी जगह रखें, जहां पक्षी सुरक्षित रहें।
● पानी भरने के लिए मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग करें। बच्चों को भी इन बर्तनों में पानी भरने के लिए प्रेरित करें ताकि उनमें पक्षियों के लिए दया व प्रेम भाव विकसित हो।
इन पक्षियों पर मंडरा रहा खतरा
गौरेया, मैना, बंगाल फ्लोरिकन, जेरडन कॉरसर, टिटहरी, उल्लू, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, चील, गिद्ध।
छोटा सा प्रयास देगा सुकून
जैन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष पंकज जैन मोगरा कहते हैं कि पक्षी प्रकृति को जीवंतता देते हैं। ये चहचहाते हैं तो जिंदगिया खिलखिला उठती है। प्रकृति के हर बदलाव का सूचक ये जीव सही मायने में हमें जीवन को जीना सिखाते हैं। वर्तमान में प्रकृति के साथ ही हमारी ज्यादतियों की मार इन्हें झेलनी पड़ रही है। कई प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं और कई इसकी कगार पर हैं। इन्हें बचाने के लिए कम से कम हम अपने घर में सकोरे तो लगा ही सकते हैं, ताकि भीषण गर्मी में प्यास से दम तोड़ते पक्षियों को बचाया जा सके।
