अधिक मोबाइल चलाने से बच्चे हो रहे हैं चीड़कपन का शिकार, पढ़ाई लिखाई की बातें कम मोबाइल की बातें बच्चे करते हैं ज्यादा | New India Times

मो. मुजम्मिल, छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

अधिक मोबाइल चलाने से बच्चे हो रहे हैं चीड़कपन का शिकार, पढ़ाई लिखाई की बातें कम मोबाइल की बातें बच्चे करते हैं ज्यादा | New India Times

वर्तमान दौर की बात की जाए तो बच्चों को एंड्राइड मोबाइल चलाना और गेमो में वक्त बिताना आम बात हो चुकी है लेकिन जिसका असर सीधा-सीधा उनके दिमाग सहित स्वभाव में नजर आ रहा है बच्चों के जिम्मेदार बताते हैं कि दिन भर अधिक समय मोबाइल में बच्चे बिता रहे हैं जिसके कारण चिड़चिड़ापन बच्चों में नजर आ रहा है जिसका असर पढ़ाई के साथ-साथ उनके नेचर में भी नजर आ रहा है छोटी-छोटी बातों को लेकर चिड़चिड़ापन करके किसी दूसरे काम में मन नहीं लग रहा कोरोना के चलते पढ़ाई भी एंड्राइड मोबाइल में ऑनलाइन चल रही है लेकिन पढ़ाई कम और गेमों में और बिगर नई नई एप्लीकेशन ओं में बच्चे अपने समय गवा रहे हैं जिसका बस माता पिता पर भी नहीं चल पा रहा जिसके कारण आने वाले समय में इसका खामियाजा कहीं ना कहीं भुगतना बच्चों को पढ़ सकता है. रास्ता चलते वक्त भी आजकल बच्चे मोबाइलों में डूबे हुए नजर आते हैं जिसके कारण कई बार ऐसी दुर्घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं. वाहन चलाते समय भी आजकल मोबाइलों में बात करते हुए चले जाते‌ हैं. अधिक मोबाइल चलाने के कारण बच्चों की आंखों पर भी नजर आ रहा है जिससे अधिक बच्चों को आंखों में चश्मे लग रहे हैं.

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ रविंद्र बाथम का कहना है की वर्तमान में बच्चे अधिक मोबाइल चला रहे हैं जिसके कारण वह खानपान पर भी ध्यान नहीं देते जिससे उनकी ग्रोथ उचित नहीं हो पा रही है रेडिसन का असर पूरी तरह बच्चों पर पड़ेगा इसलिए मोबाइल का उपयोग आवश्यकता अनुसार करना चाहिए.

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