मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

अपने आप को मुस्लिम समाज का एकमात्र प्रतिनिधि बताने वाले भोपाल के विधायक आरिफ़ मसूद सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आए हैं। माना जा रहा है कि खरगोन के दंगों के बाद शायद वे अब नींद से बेदार हुए हैं। उन्होंने मुफ्ती जुनैद फलाही इंदौर, मुफ्ती मोहम्मद रफीक क़ासमी खरगोन, मुफ्ती अली कदर हुसैनी भोपाल, क़ाज़ी अज़मत शाह मक्की भोपाल, क़ाज़ी रमज़ान नदवी कन्नौद, क़ाज़ी मोहम्मद शहरयार आष्टा, अब्दुल नफीस के साथ मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को ज्ञापन दिया है। ज्ञापन के माध्यम से इन प्रतिनिधियों ने मुख्य सचिव से मांग की है कि खरगोन हिंसा में लापता इदरीस खान का शव बरामद हुआ उसके शव का पीएम वीडियोग्राफी कर किया जाए और दोषी लोगों का प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए। ज्ञापन के अनुसार प्रतिनिधिमंडल में मध्य प्रदेश के खरगोन जिले एवं आसपास के अन्य जिलों में हाल ही में घटित घटना के निम्न मुख्य बिंदु की ओर ध्यान आकर्षित कराया है:
1) एक व्यक्ति जो पूवे से ही न्यायिक अभिरक्षा में है उन पर पत्थरबाजी का आरोप लगाकर उनके घर को बुलडोजर से गिरा दिया गया है।
2) निर्दाेष लगभग 200 लोगों को गिरफ्तार किया गया उनमें से कईंयों कि हड्डी फ्रेक्चर हैं। वह घटना के 4-5 दिन बाद जेलों में भेजे गए हैं यह भी पता लगाना होगा की उनकी हड्डी में फ्रेक्चर कैसे आए? यदि दंगाईयों ने तोड़ी हैं तो दंगाईयों के विरूद्ध कार्यवाही हो और उनके तत्काल मेडिकल कराए जाएं अगर पुलिस के द्वारा मारपीट से उनकी हड्डीयों में फ्रेक्चर आए हैं तो पुलिस के विरूद्ध कार्यवाही की जाए।
3) इसी तरह उपद्रव के दौरान जो मुसलमानों के मकान जलाए गए हैं उन उपद्रवीयों के फोटोग्राफ मौजूद हैं। उन्होने नारे लगाते हुए झण्डा फैराते हुए पत्थर मारते हुए घरों और दुकानों में आग लगाई है उनको चिन्हित किया जाकर सख्त से सख्त कार्यवाही और जिन के मकान जलें हैं उनको मुआवजा दिया जाए।
4) इस घटना के बाद से ही लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ असमाजिक तत्व मुसलमानों को सामान नहीं बेचने के मैसेज चला रहे हैं उनके विरूद्ध भी कार्यवाही की जाए क्यों कि कर्फ्यू में चंद घंटों की ही ढील मिल रही है। यदि ऐसी परिस्थिति निर्मित होगी तो यह बहुत ही विस्फोटक स्थिति है।
5) इसी तरह एक व्यक्ति, जो कि घटना के समय ट्रक लेकर महाराष्ट्र गए हुए थे तथा कईं वर्षों पूर्व मर चुके व्यक्ति का नाम भी पुलिस ने दंगाईयों के विरूद्ध की गई एफआइआर में आरोपियों के साथ जोड़ दिया है। इससे पुलिस की संपूर्ण कार्यवाही पर स्वतः ही प्रश्न चिन्ह लगता है। ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस ने राजनैतिक दबाव के चलते नेताओं से प्राप्त सूची के आधार पर एफआइआर में नाम लिख दिए हैं,, ना कि घटना के वास्तविक आरोपियों की पहचान कर नाम लिखे गए हैं।
6) एक तरफ़ खरगोन की घटना में एक अल्पसंख्यक परिवार के लड़के को गोली लगने पर वह जिन आरोपियों का नाम बता रहा है पुलिस उनके नाम ना लिखकर अन्य लोगों के नाम लिख रही है।
7) दो दिन पूर्व उपद्रवीयों द्वारा एक फेक्ट्री को आग लगा दी गई और जब फरियादी द्वारा थाने में रिपोर्ट लिखाई जा रही थी तो पुलिस द्वारा शार्ट सर्किट का बोल कर एफआइआर दर्ज नहीं की गई। ज्ञापन सौंपने वालों का मानना है कि अभी भी स्थानीय प्रशासन, वरिष्ठ अधिकारीयों को घटना की वास्तविकता से अवगत नहीं करा रहा है,बल्कि एक राजनैतिक पार्टी के दबाव में लगातार निर्दाेष परिवारों के मकानों पर शासन द्वारा बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। वैसे भी बिना किसी पूर्व सूचना/नोटिस के किसी के घर पर बुलडोजर चलाना कहॉ तक न्यायोचित है? यह हमारी समझ से परे है। जिस तरह खरगोन की घटना के बाद से प्रशासन एक तरफा कार्यवाही करा रहा है उससे लगता है कि मध्यप्रदेश के शासन प्रशासन पर बैठे हुए अधिकारियों का न्यायालयों से भरोसा उठ गया है इसीलिए शायद वह न्यायालयों के फैसले के आने का इंतेज़ार नहीं कर रहे हैं। ज्ञापन के माध्यम से आग्रह किया गया है कि शांति समिति की बैठक की जाकर जल्द कर्फ्यू बहाली के प्रयास किये जाएं, ताकि आमजन रोजमर्रा के ज़रूरतों का सामन ले सके, उपरोक्त सभी बिन्दूओं की जॉच के लिए एक हाई पावर कमेटी गठित कर स्वयं की निगरानी में जॉच कराएं एवं तत्काल निर्दाेषों पर की जा रही कार्यवाही को रोकें तथा उनको मुआवजा दिया जाए।
