रहीम शेरानी/कादर शेख, थांदला/झाबुआ (मप्र), NIT:

कहते हैं कि सेवा करने के लिए किसी लक्ष्य की आवश्यकता नहीं, जब आवश्यकता हो तब ही सेवा की जा सकती है. कुछ माह पूर्व नगर की शांति कॉलोनी में समाजसेवी मंडल अध्यक्ष और नगर के हित में सोचने वाले कर्मठ पार्षद गोलू उपाध्याय की नजर एक ऐसी असहाय गाय पर पड़ी जिसके बाईं आंख में सूजन थी व खून निकल रहा था. जब उन्होंने नगर परिषद के कर्मचारी रवि डागर को इस घटना के बारे में बताया तो डागर ने गाय को पकड़कर के कांजी हाउस लाया गया जिसके बाद उसका प्राथमिक उपचार पशु चिकित्सालय के चिकित्सक डॉक्टर खराड़ी डॉक्टर खरे और डॉक्टर मनीष भट्ट के द्वारा शुरू किया गया. 1 महीने से निरंतर उसकी आंख के घाव को सुखाने का कार्य चल रहा था जिसमें समाजसेवी राकेश तलेरा की पत्नी सुषमा राकेश तलेरा मेडिकल संचालक सिद्धू काकरिया प्रशांत उपाध्याय तनुज कांकरिया का सहयोग दवाइयों के लिए लिया जा रहा है,
भगवती ब्रजवासी, पत्रकार आत्माराम शर्मा, पत्रकार कादर शेख का सहयोग दिन में पानी और भोजन के लिऐ लिया गया
लेकिन दिनों दिन गाय की आंख में सड़न बढ़ती जा रही थी जिसको देखते हुए डॉक्टर खराड़ी ने निर्णय लिया कि इस गाय की आंख को पूरी तरीके से साफ करके और उसे ताकि लेना उचित होगा उसके बाद गोलू उपाध्याय ने निर्णय लिया कि इसे कांजी हाउस में पुनः बंद करके और इसका ऑपरेशन करना होगा.
दोपहर डॉक्टर्स की टीम ने गाय की आंख को पूरी तरीके से साफ किया और लगभग पूरी खत्म हो जाने के बाद उसके दोनों चमड़ी को सिल दिया गया है और डॉक्टर ने सलाह दी है कि तकरीबन एक महीना और इसे घाव सूखने के इंजेक्शन दिए जाएंगे जिससे कि गाय के घाव को भरने में सहायता मिलेगी वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि गैंग्रीन टाइप का इसे रोग हुआ है जो कि ठीक होना संभव नहीं है फिर भी सभी लोगों को लगा कि जितना प्रयास किया जाए उतना करना चाहिए तथा एक नंदी जो कि नगर में भ्रमण कर रहा था उसके पीठ पर काफी चोट लगी थी जिसको कव्वे खा रहे थे जिसको समाजसेविका सुषमा राकेश तलेरा ने देखा और गोलू उपाध्याय की मदद ली जिसको कांजी हाउस लाकर 2 माह तक इलाज किया गया क्योंकि जीवो में भी प्राण होते हैं और दर्द उन्हें भी होता है इसी के साथ समर्थ उपाध्याय नगर को एक मैसेज दिया की अपने पशु घर में ही बांधे यदि उन्हें किसी प्रकार की चोट लगती है तो उनका इलाज करना बहुत कठिन होता है जिसमें कई प्रकार की समस्याएं उठाना पड़ती है और गाय तो फिर भी हमारी माता है उन्हें हमें हमेशा पूजनीय समझकर के कार्य करना चाहिए इस कार्य में कई समाजसेवियों ने भोजन की व्यवस्था की है जिनके लिए सभी साधुवाद के पात्र हैं.
