मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

भारतीय जनता पार्टी बुरहानपुर के जिला अध्यक्ष मनोज भीमसेन लधवे ने पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं प्रदेश भाजपा प्रवक्ता श्रीमती अर्चना चिटनीस दीदी सहित पूर्व विधायक गण सर्वश्री रामदास शिवहरे (काका), नेपानगर की पूर्व विधायिका सुश्री मंजू दादू, नगर पालिक निगम बुरहानपुर के पूर्व महापौर अतुल पटेल की मौजूदगी में प्रदेश भाजपा महामंत्री श्री भगवान दास सबनानी को एक ज्ञापन सौंपकर बुरहानपुर का नाम ब्रह्मपुर करने की मांग करते हुए कहा कि मप्र सरकार को बुरहानपुर के इतिहास से अवगत कराकर शहर का नाम परिवर्तित कर ब्रह्मपुर कराया जाए। पौराणिक इतिहास में बुरहानपुर का नाम ब्रह्मपुर ही था जो बाद में बदल दिया गया था।
पत्र में भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज लधवे ने कहा आजादी के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकारों की तुष्टीकरण की नीति के चलते अनेक शहरों के नाम मुगल शासकों के नाम पर रखे गए, जबकि इन नगरों के प्राचीन नाम धार्मिक पुराणों में उल्लेखित है। कांग्रेस सरकारों का यह कृत्य भारत की सनातन संस्कृति व सभ्यता पर एक आघात है। 8 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रवादी सरकार की स्थापना के पश्चात भारतीय संस्कृति के पुनरूत्थान व महापुरूषों के योगदान को दृष्टिगत रखते हुए अनेक शहरों के नाम परिवर्तित किए गए। जिससे की प्राचीन भारत के गौरवशाली इतिहास को पुर्नस्थापित किया जा सके। देश की नई पीढ़ी उन महापुरूषों के योगदान से परिचित हो सके। इसी संदर्भ में मां ताप्ती के किनार स्थित प्राचीन व ऐतिहासिक नगर बुरहानपुर के नाम परिवर्तन का प्रस्ताव दिया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर हो रहा है विरोध
भाजपा जिला अध्यक्ष श्री मनोज भीमसेन लधवे, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं प्रदेश भाजपा प्रवक्ता श्रीमती अर्चना चिटनीस दीदी का इस संबंध में फोटो प्रदर्शित होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर इसका पुरज़ोर विरोध हो रहा है। इस मांग के सामने आने से भाजपा के कुछ अल्पसंख्यक नेता भी आश्चर्यचकित हैं। लेकिन पार्टी गाइडलाइन के कारण अपनी बात को कह पाने में असमर्थता व्यक्त कर रहे हैं। शाह चमन वली सामाजिक संगठन सहित कई पार्टियों के नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस पर अपना विरोध जाहिर किया है। सत्ता के नशे में भाजपा अपने इस लक्ष्य या मिशन में कामयाबी हासिल कर सकती है, लेकिन अंदरूनी तौर पर उसका विरोध होने से आने वाले समय में उसे भारी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। भाजपा की इस मांग से दो संप्रदायों के बीच दूरियां बढ़ने की आशंका नजर आ रही है।
