यूसुफ खान, ब्यूरो चीफ, धौलपुर (राजस्थान), NIT:

कभी शहर चौराहे की शान रहे फव्वारों को भूल जाएं क्या साहब? ये सवाल आजकल हरेक उस इंसान के दिलो-दिमाग में कौंधता है जिसने कभी इन फव्वारों की शान-शौकत देखी हो की धौलपुर शहर के लाल बाजार स्थित डाकखाना चौराहे की शान फव्वारा रहा है, सुंदरीकरण को चार चांद लगाने वाले फव्वारा आजकल महज गंदगी के ढेर और कूड़ेदान माफिक बनकर रह गए हैं. इनकी हालत देखकर तो ये कतई नहीं लगता कि नगर परिषद या जिला प्रशासन शहर के सुंदरीकरण को लेकर तनिक भर भी गंभीर है कि धौलपुर शहर के लाल बाजार रोड़ से रेलवे स्टेशन रोड पर जगन चौराहे पर जाने वाले मोड़ पर डाकखाना चौराहा पर फव्वारा था इसके बाद तत्कालीन नगर परिषद पूर्व सभापति रितेश शर्मा के बदौलत यह चौहरे के फव्वारे को द्वारा बनाया गया यहां पर शानदार रंग-बिरंगा फव्वारा लगवा दिया क्योंकि यह काफी वर्षों से फव्वारे के नाम से ही चौहरे को जाना जाता था इस बेहतरीन फव्वारे की सबसे खास बात ये थी कि इसकी एक भी बूंद फव्वारा की चारदीवारी से बाहर नहीं गिरती थी लेकिन नगर परिषद के अफसर एव सभापति बदले तो इनके हालात भी बदले पिछले कुछ सालों से इस बेहतरीन फव्वारे को जैसे लापरवाही और अफसरी ढिलाई की नजर लग गई अब यहां पर चौराहे का नाम तो फव्वारा चौराहा है, लेकिन फव्वारा कभी चलता नहीं दिखता लेकिन अफसरी लापरवाही इसे भी लील गई एक बार ये फव्वारे खराब हुए तो दोबारा इसे रिपेयर करवाने की किसी ने जहमत तक नहीं उठाई जब ये चलने ही बंद हो गए थे तो इसे कूड़ेदान का ढेर बनते देर कहां लगनी थी और कमोबेश हुआ भी कुछ ऐसा ही। फव्वारे के नाम पर सिर्फ कुछ निशानियां बची हैं बाकी तो सब यहां गंदगी के ढेर ही दिखते हैं शायद अब इन फव्वारों के दिन फिरेेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
