मेहलका इकबाल अंसारी, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

हाजी एजाज अहमद राही ने बताया कि मेरा बुरहानपुर मेरी विरासत सोशल मीडिया ग्रुप के माध्यम से इस ग्रुप के सदस्यों ने जैनाबाद के पाइन बाग में 390 साल बाद पहली बार एकत्रित होकर 17 जून 2021 को बेगम मुमताज़ की बरसी मनाई। इस अवसर पर ग्रुप के सदस्यों में कमरूद्दीन फलक, नौशाद खान, हाजी एजाज अहमद राही, डाक्टर सुभाष माने, रमेश दलाल, मनसूर सेवक, डॉ मनोज अग्रवाल, रियाजुल हक़ अंसारी, याकूब बोरिंग वाला, शब्बीर अहमद बाबा सहित ग्रुप के लगभग डेढ़ दर्जन सदस्यों ने शिरकत की। अपनी याद को चिरस्थाई बनाने के लिए सदस्यों ने वृक्षारोपण भी किया। इस अवसर पर कमरुद्दीन फलक, नौशाद खान ने इसके इतिहास पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। हाजी एजाज अहमद राही की कयादत में नमाज भी अदा की गई।

इस ग्रुप के सदस्यों के मतानुसार बेगम मुमताज की मृत्यु 17 जून 1631 ईस्वी मंगलवार के दिन 14 वीं संतान के जन्म के समय हुई थी। जबकि बुरहानपुर के शहजादा मोहम्मद आसिफ खान गौरी 7 जून को मुमताज़ की बरसी मनाते चले आ रहे हैं। बेगम मुमताज को जैनाबाद के पाइन गाह पर अस्थाई कब्र बना कर 6 माह तक रखा गया था। हाजी एजाज अहमद राही ने बताया कि शहजादा आसिफ मोहम्मद खान गौरी विगत 52 वर्षों से नहीं बल्कि 32 वर्षों से 7 जून को बेगम मुमताज की बरसी मनाते आ रहे हैं। अपने इस कथन की प्रमाण में उन्होंने मुंबई से प्रकाशित एक दैनिक उर्दू समाचार पत्र में उस समय की उनकी रिपोर्टिंग की क्लिपिंग भी पेश की है। शहजादा आसिफ खान गौरी के प्रोग्राम की तर्ज़ पर मेरा बुरहानपुर मेरी विरासत सोशल मीडिया ग्रुप के सदस्यों ने भी अपना आयोजन किया है और इस आयोजन को करने का उन्हें हक हासिल है। इतिहास में कई बार सही तारीख को लेकर कई जगह कुछ अंतर जरूर देखने को मिलता है यहां भी 7 जून और 17 जून की तिथियां सामने आई है। जिन्हें नजरअंदाज करके अपने अपने कार्यक्रम, अपने अपने मिशन के तहत, अपने-अपने अंदाज में संपन्न किए जा सकते हैं। मेरा बुरहानपुर मेरी विरासत के अधिकतर सदस्य किसी समय शहजादा आसिफ खान से ही जुड़े थे लेकिन अब इन्होंने अपना अलग कार्यक्रम प्रारंभ किया है।
