दौरे-प्रदेश से बाहर घूमने अकेला नहीं छोड़ते, बाहर आया फौरन आकर देखते डांटते जैसा बच्चों को डांटते हैं : मो. तारिक  | New India Times
  • 13 जून जन्मदिन विशेष : दीपक जोश

मोहम्मद तारिक, भोपाल, NIT; ​दौरे-प्रदेश से बाहर घूमने अकेला नहीं छोड़ते, बाहर आया फौरन आकर देखते डांटते जैसा बच्चों को डांटते हैं : मो. तारिक  | New India Timesसंत पुरुष कहे जाने वाले, भाजपा के वयोवृध्द नेता, पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व सांसद व पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष परम आदरणीय पितातुल्य मा कैलाश जोशी जी के सुपुत्र दीपक जोशी (शिक्षा राज्यमंत्री तकनीकी शिक्षा स्वतंत्र प्रभार) का जन्मदिन ! 

शिक्षा राज्यमंत्री तकनीकी शिक्षा स्वतंत्र प्रभार माननीय दीपक जोशी ने 13 जून जन्म दिन पर उन्होंने आह्वाहन करते हुए कहा कि आप मुझे फूलों की माला बुके या कोई गिफ्ट न दीजिए, यदि आप मुझसे प्रेम करते हैं तो मुझे निर्धन गरीब बच्चों के लिए पेंसिल रबर पुस्तकें दीजिए ! आप जब से शिक्षा मंत्री बने हैं जब से निरंतर यही आह्वान … 

 कहने को तो हम अलग-अलग महा-विद्यालय फिर भी छात्र राजनीति से साथ रहे ! शिक्षा ग्रहण करने के बाद अपने-अपने क्षेत्रों में ! उसके बाद भी जब मिले पूर्व मुख्यमंत्री सुपुत्र दीपक जोशी तो अपने गले से लगा झूमा लेते ! लगता था जैसे बहुत पुराने बिछड़े यार मिले, न था घमंड बस दोस्त और दोस्ती की पहचान ! हम दोनों की आयु में 3-4 वर्ष का अंतर ही होगा यह अचरज की बात नहीं आश्चर्य की बात तो यह है कि जब मैं कभी उनके साथ गया दौरे या प्रदेश से बाहर कहीं घूमने तो वह मुझे बिल्कुल अकेला नहीं छोड़ते और यदि मैं उन्हें बिना बताए कहीं बाहर आ गया तो फौरन मुझे बाहर आकर देखते डांटते भी जैसा बच्चों को डांटते हैं वैसा डांटते !

खेलों को बढ़ावा देने की मेरी रुचि देखकर उन्होंने सामाजिक संरचनाओं के कार्य से जोड़ने हेतु वर्ष 2011 में अपने मोबाइल से पूर्व छात्र नेताओं, ईस्ट मित्रों सहित सैकड़ों साथियों के नाम और नंबर सौंप दिए जिसके माध्यम से एक्टिव फ्रेंड्स भोपाल एक सामाजिक संस्था के रूप में भोपाल में शहर में, राजधानी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने लगा जो आगे चलकर एक्टिव फ्रेंड्स वेलफेयर सोसाइटी भोपाल का गठन हो पाया !

 सत्य कहते कार्यकर्ता को नेता बनाने में बहुत बड़ा योगदान ऐसे अनुशासित दयालु एवं सरल स्वभाव के हैं हमारे दीपक जोशी ! हां एक सत्य और बताना चाहूंगा कि जब 2004 में मैंने भाजपा ज्वाइन की जब मुझे 3 विभागों में से कोई भी एक विभाग चुनने के लिए कहा गया था परंतु मैंने यह कह कर मना कर दिया था कि मैं तो अभी-अभी आया हूं जो पहले से लोग हैं उन्हें नवाजा जाए ! हां यह जरूर है कि 8-10 माह के लिए मजबूरीवश खेल प्रकोष्ठ का मुझे प्रदेश सह-संयोजक व कार्यालय प्रभारी बनाया गया क्योंकि विधानसभा का चुनाव भी नजदीक था और संयोजक विधायक दीपक जोशी को अपना विधानसभा क्षेत्र देखना था मैं उनके इसरार को टाल ना सका और उन्होंने एक और मुझे मौका दिया ! पार्टी की ओर से जो दायित्व मिला उसे निभाया ! पूरे प्रदेश के अंदर खिलाड़ियों को खेल प्रकोष्ठ से जोड़ा ! प्रदेश से लेकर मंडल तक सिर्फ खिलाड़ी कोच और खेल संघों पदाधिकारियों को जोड़ा पदाधिकारी बनाया पार्टी का 3% मत बढ़ाया !

मैं कार्यकर्ता रह कर ही पूरे देश और प्रदेश में अपने कार्य को देख सकता हूं क्योंकि भीड़ का हिस्सा नहीं भीड़ का कारण बनना चाहिए !

         “अब तो यह वैचारिक द्वंद है !”
                         मो. तारिक 

                      (स्वतंत्र लेखक)

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