अशफाक कायमखानी, सीकर (राजस्थान), NIT;
मध्यप्रदेश के किसान आंदोलन को लेकर किसानों के कर्ज माफी के लिए भारत भर में किसान आंदोलन पर उतारु हैं, तो भला सीकर में किसानों के इस मुद्दे को लेकर माकपा-कांग्रेस कैसे पीछे रह सकते हैं। यहां एक दुसरे को मात देकर खुद किसान हमदर्द बनाने के लिये एक दूसरे में शह व मात का खेल चल रहा है।
मध्यप्रदेश में 9 किसानों के पुलिस गोली से मारे जाने के बाद जिला कांग्रेस ने 17-जून को कृषि उपज मंडी में विशाल रैली करने का ऐहलान किया था। दूसरी तरफ कांग्रेस को मात देते हुये माकपा ने दो दिन बाद बैठक करके उसी कृषि उपज मंडी में 16-जून को विशाल किसान रेली करने का ऐहलान करके कांग्रेस को पिछे धकेलते हुये किसान हित का सर्वसेवा साबित करने की कोशिश की थी। लेकिन कांग्रेस ने नहले पर दहला मारते हुये 17-जून के बजाय 14-जून को उसी कृषि उपज मंडी प्रांगण में विशाल किसान रैली करने का ऐलान करके माकपा के सामने भीड़ जुटाने को लेकर संकट खड़ा कर दिया है।
कुल मिलाकर यह है कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया के कांग्रेस जोइन करने के बाद जिला कांग्रेस का भी किसान समसायाओ को उठाकर उनके हल के लिये सरकार पर दवाब बनाने का चलन जोर पकड़ा है। दूसरी तरफ माकपा की सियासत का प्रमुख बेस किसान ही है। देखते हैं कि वामपंथी अब अपनी किसान रैली की तारीख 14-जून ही रखते है या फिर तेराह जून तय करते हैं। ज्ञात रहे इससे पहले इसी साल शुरुवात में बिजली दर वृदि को लेकर वामपंथियों ने कृषि उपज मंडी प्रांगण सीकर में विशाल रैली करके आंदोलन चलाया था। उसके बाद जिला कांग्रेस ने भी उसी प्रांगण में उसी तरह किसान रैली करना तय किया था लेकिन ऐन वक्त पर उस रैली को रद्द कर दिया गया था, जिससे कांग्रेस की शाख को धक्का लगा था।
