मोहम्मद तारिक, भोपाल, NIT; T
देश के शहरों में घनी बस्तियां, सकरी सड़कें, आबादी भी दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। आबादी के साथ-साथ उनकी जीवन के साधन दो पहिया वाहन, चार पहिया वाहन भी बढ़ते जा रहे हैं ! भवनों के निर्माण में नुजूल (राजस्व विभाग), संचानालय ग्राम तथा नगर निवेश सहित नगर पालिक निगम का उदासीन रवैया। अब लोगों के पास वाहन तो है लेकिन पार्किंग के लिए स्थान नहीं ! क्योंकी जब भवन नव निर्माण के लिये नुज़ूल विभाग अनापत्ती प्रमाण पत्र लेने अपने स्वामित्व दस्तावेज़ों के आधार पर तो दस्तावेज़ों की जांच उपरांत नुज़ूल विभाग यह प्रमाणित कर यह लिखा देता की यह शासकिया भूमी नहीं ! उसके उपरांत भवन निर्माण अनुमती की मुख्य एजेंसी आपकी नुज़ूल प्रमाण पत्र, दस्तावेज़ सहित प्रमुखत: सम्पत्ती कर जल कर नो डीयूज़ प्रमाण पत्र जांच और नव निर्माण मानचित्र में एफएआर सेट बेक की कांट छांट कर निर्धारित शुल्क लेकर भवन निर्माण अनुमति प्रमाण पत्र जारी कर देगा फिर कभी जाकर नहीं देखेगा की भवन निर्माण मानक अनुसार बना भी हैं की नहीं पार्किंग बनाई भी की नहीं !
आप सबसे आग्रह कर यहां यह भी कहना चाहूंगा कि भवन नव निर्माण में पार्किंग नहीं तो वो अपनी चार पहिया वाहन कहां खड़ी करेगा अब जिस नगर निगम वार्ड/ज़ोन और थाना के प्रभारी के अधिकार क्षेत्र अधिकार क्षेत्र के अंदर अवैध पार्किंग होती है तो कार्यवाहीं का उत्तरदायित्व भी आपका जबकी उन पर कभी कोई कार्यवाही नहीं होती थी !
पीस इन्डिया एनजीओ नेशनल पीआरओ एंड स्टेट एम पी प्रेसीडेंट सहित स्वतंत्र लेखक मो तारिक ने उठाया बीड़ा और अब उठ रहीं सड़कों पर यहां वहां महिनों से खड़ी गाड़ीयां ! अभी मुख्य सड़क मुख्य बाज़ार की सड़कें फिर अब और तेज़ हौगी कार्यवाहियां सकरी सड़कों पर खड़ी गाड़ीयों पर जहां महीनों महीनों भर गैस किट लगी गाड़ियां खड़ी रहती हैं अगर एक गाड़ी के अंदर आग लग जाए और सारी गाड़ियां वहां खड़ी हुई है जिसमे गैस सिलेंडर फट जाये तो आप खुद अंदाजा लगाइए क्या भयावह तस्वीर होगी शहर की !
भोपाल शहर में यातायात पुलिस की कड़ी कार्यवाही के चलते मंचा हुआ हड़कम्प शासन का भी भर रहा खज़ाना मार्ग हों रहें खाली साफ सुथरे व्यवस्थित : धन्यवाद यातायात पुलिस !
अब अगर मुझे किसी से शिकायत है तो मैं थाने जाऊं कंट्रोल रूम जाऊं अधिकारियों को बोलूं अरे भाई नगर पालिक निगम सीमा आपके अधिकार क्षेत्र में है जिला पुलिस प्रशासन आपके अधिकार क्षेत्र में है थाने भी आपके और आपको इसी बाबत तो रखा गया है ! आप अपने उत्तरदायित्वों का निरंतर निर्वहन करिए श्रीमान, श्रीमान, श्रीमान वरना त्यागपत्र दीजिए घर जाइए !
“अब यह तो वैचारिक द्वंद हैं !”
मो. तारिक(स्वतंत्र लेखक)
