शिक्षा के मंदिर में ग्रामीणों ने किया श्रमदान | New India Times

यूसुफ खान, ब्यूरो चीफ, धौलपुर (राजस्थान), NIT:

शिक्षा के मंदिर में ग्रामीणों ने किया श्रमदान | New India Times

शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास की धुरी होती है। शैक्षिक आयामों को स्थापित करने में विद्यालय का स्थान महत्वपूर्ण होता है। विद्यालय रूपी उपवन वह पवित्र स्थल होता है जहां पर उस बीज का रोपण होता है जो अंकुरित, विकसित और पुष्पित-पल्लवित होकर राष्ट्र निर्माण में अपनी महती भूमिका अदा करता है। आज उसी उपवन को सुंदर और स्वच्छ बनाने के लिए सरमथुरा क्षेत्र के गांव हुलासपुरा के ग्रामीणों ने शिक्षा के प्रति जागरूकता एवं विकास के निहितार्थ जनसहभागिता का परिचय देते हुए करीब 4 घंटे श्रमदान किया। ज्ञातव्य है कि करीब 3 वर्ष पूर्व राजकीय प्राथमिक विद्यालय हुलासपुरा ने अपना अस्तित्व खो दिया था, जब तत्कालीन सरकार ने विद्यालय को मर्ज कर बंद कर दिया। राजस्थान सरकार के आदेशानुसार इस सत्र से यह विद्यालय पुनः अपना अस्तित्व यथावत स्थान पर धारण कर चुका है। जब प्रतिनियुक्ति पर लगाए शिक्षक तीन वर्ष से बंद पड़े विद्यालय को खोलने पहुंचे तो ग्रामीणों में एक नई ख़ुशी का संचार हुआ और मिलकर विद्यालय को गति देने का शिक्षक को आश्वासन दिया। जब गांव के युवाओं एवं बुजुर्गों ने शिक्षक के साथ मिलकर विद्यालय की भौतिक स्थिति का अवलोकन किया तो पाया कि विद्यालय के कक्षा-कक्ष आवारा पशुओं की शरण-स्थली बने हुए थे और कक्षा-कक्षों में पशुओं के मल-मूत्र का अंबार लगा हुआ था। विद्यालय की चारदीवारी भी ध्वस्त हो चुकी थी और विद्यालय प्रांगण कंटीली झाड़ियों से आच्छादित था। विद्यालय की बदहाल स्थिति को देखकर युवाओं के साथ-साथ बुजुर्ग भी विद्यालय की सूरत को बदलने के लिए आगे आए। सर्वप्रथम ग्रामीणों ने विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर ध्वस्त पड़ी विद्यालय की चारदीवारी को ठीक किया ताकि पौधों को पशुओं से बचाया जा सके। शैक्षिक, पर्यावरणीय प्रयोजन एवं सकारात्मक सामाजिक बदलाव की दिशा में निरंतर प्रयासरत सोच बदलो गांव बदलो टीम से प्रेरित जुनूनी कार्यकर्ताओं की कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव के आगे भीषण गर्मी परास्त हो गई। कार्यकर्ता भीषण गर्मी के बीच विद्यालय परिसर में खड़ी कंटीली झाड़ियों को काटकर परिसर को साफ़ करने के लिए पूरी तन्मयता से डटे रहे। तत्पश्चात् नज़दीकी समर्सिबल से पाइपलाइन द्वारा पानी लाकर विद्यालय के कक्षा-कक्षों से पशुओं के मल-मूत्र को साफ़ किया और फ्लोर को चमकाया। अंत में ग्रामीणों ने बच्चों की प्रवेश प्रक्रिया में शिक्षक का सहयोग किया और अपने बच्चों को विद्यालय में दाखिला दिलाया। इस मौके पर शिक्षक श्री रतनसिंह के साथ-साथ नारायनसिंह,लालाराम, दिनेश, विद्याराम,कुमरसिंह,द्वारिका,पोपसिंह,राममूर्ति, सतीश,राधेश्याम,माखन, प्रेमसिंह, जीतू, रामअवतार, उमेश,आशाराम,रावि,गनेश एवं अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

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