रहीम शेरानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

कोरोना महामारी के चलते पूरे देश में 60 दिनों से अधिक समय से लॉक डाउन लगातार जारी है, ऐसे में हर किसी के सामने रोजगार व आमदनी को लेकर संकट खड़ा हो गया है। इस संकट से किसान भी अछूते नहीं हैं। किसानों के सामने भी लॉकडाउन के चलते कई परेशानियां आ खड़ी हुई हैं।
पेटलावद क्षेत्र का किसान टमाटर की सबसे ज्यादा पैदावार करता है जो कि टमाटर अन्य राज्यों सहित अन्य देशों तक पहुंचता है लेकिन लाॅकडाउन के चलते टमाटर के भाव इस वर्ष नहीं मिल सके। किसानों ने लाखों रुपए खेती पर खर्च किए हैं लेकिन टमाटर को खेतों से निकालकर फेंकने पर मजबूर होना पड़ा क्योंकि लाॅकडाउन के चलते किसानों के टमाटर बाहर नहीं जा सके, ऐसे में किसानों को भारी नुकसान हुआ है। लेकिन किसानों की फसल की बर्बादी के बाद भी उन पर संकट के बादल कम नहीं हुए हैं, उनके द्वारा केसीसी के माध्यम से जो लोन लिए गए थे उनको लेकर भी अब बैंक का दबाव किसानों पर आने लगा है जिसको लेकर रायपुरिया क्षेत्र के कई किसानों को बैंकों की ओर से नोटिस भेजे गए हैं, जिनमें उन्हें तत्काल पैसा जमा कराने की बात कही जा रही है।रायपुरिया निवासी जगन्नाथ पाटीदार को भी केसीसी लोन को लेकर ब्याज जमा करने को लेकर नोटिस प्राप्त हुआ है।
किसान ने चर्चा के दौरान संवाददाता को बताया कि लॉक डाउन के चलते हमारी स्थिति फिल्हाल ठीक नहीं है। हम लोन तो जरूर भरेंगे किंतु इस वक्त हमारी फसल को भी भारी नुकसानी हुई है ऐसे में लोन को पलटी करना या फिर उसका ब्याज भरना काफी मुश्किल है क्योंकि लगातार लॉक डाउन चल रहा है और आमदनी के नाम पर अभी हमारे पास फिल्हाल पैसा नहीं है किंतु बैंकों के आ रहे नोटीस से हमारे ऊपर संकट खड़ा है।
जगनाथ पाटीदार जैसे कई किसान है जिन्हें बैंकों से नोटिस प्राप्त हो रहे हैं। अब फसल में तो उन्हें मुनाफा मिला नहीं किंतु बैंकों के आ रहे नोटिस के जवाब में उन्हें पैसा तो जमा करना ही होगा इसलिए किसानों ने मांग भी की है की उन्हें सरकार राहत दे ताकि वह अपनी स्थिति सुधरने कर बैंक का पूरा पैसा जमा करवा सकें।
