अशफाक कायमखानी, लखनऊ/नई दिल्ली, NIT:
कांग्रेस पार्टी ने देश में काफी जगह मुस्लिम उम्मीदवार इसलिए लोकसभा चुनाव मे उतारे हैं कि अव्वल तो वहां से काग्रेंस उम्मीदवार के जीतने के चांसेज कतई नहीं होते हैं बल्कि कांग्रेस उम्मीदवार के चुनाव लड़ने के कारण सेक्युलर मतों का बंटवारा होकर अन्य उम्मीदवार के जीतने के चांसेज अधिक हो जाते हैं।
कांग्रेस पार्टी ने जब बिहार में तारिक अनवर को उनकी पैत्रिक सीट कटिहार की बजाय अन्य जगह किशनगंज से उम्मीदवार बनाने की कोशिश की तो तारिक अनवर के दवाब के कारण फिर से कटिहार से ही उम्मीदवार बनाने पर कांग्रेस को मजबूर होना पड़ा। इसी तरह कांग्रेस ने मुरादाबाद में भी सेक्युलर मतों का बंटवारा करने की कोशिश की है। मुरादाबाद से कांग्रेस के घोषित उम्मीदवार राज बबर को हार नजर आई तो वो भागकर आगरा चले गये और कांग्रेस ने शायर इमरान प्रतापगढ़ी को मुरादाबाद से उम्मीदवार बनाकर भेजा ताकि सेक्युलर मतों का बंटवारा हो सके।
इसी तरह कांग्रेस ने जब यूपी की अमरोहा लोकसभा सीट पर भी सेक्युलर मतों के बंटवारे का खेल खेलना चाहा तो अमरोह से कांग्रेस के घोषित उम्मीदवार व पूर्व राज्य सभा सदस्य राशिद अल्वी के चुनाव लड़ने से मना करने के बाद कांग्रेस को वहां भी उम्मीदवार बदलना पड़ा।
ज्ञात रहे कि मुरादाबाद को लोटो के कारण जानने के अलावा 13 अगस्त 1980 में ईद के दिन ईदगाह में पुलिस गोली से 13 नमाजियों को भूनने के कारण भी जाना जाता है। 1980 के मुस्लिम मुरादाबाद जनसंहार के समय यूपी व केंद्र दोनों जगह कांग्रेस की ही सरकार थी।
