सुविधाओं के अभाव में बेबसी के आलम में जीने को मजबूर हैं लहरपुर वासी | New India Times

हाशिम अंसारी, ब्यूरो चीफ, सीतापुर (यूपी), NIT:

सुविधाओं के अभाव में बेबसी के आलम में जीने को मजबूर हैं लहरपुर वासी | New India Times

लहरपुर भारत के राज्य उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद की एक ऐतिहासिक तहसील, विकास खण्ड एवं थाना मुख्यालय है। वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या 100,070 थी। यह मुग़ल शासक अकबर के नवरत्न राजा टोडरमल की जन्मस्थली के रूप में जानी जाती है। महान सन्त व कालजयी कवि गोस्वामी तुलसीदास के यहां के सूरजकुंड तीर्थ स्थल पर आने के प्रमाण भी उपलब्ध हैं। सूफी सन्त हज़रत मज़ाशाह कलन्दर की दरगाह यहां पर स्थित है जिसके सालाना उर्स मुबारक के अवसर पर कई जनपदों से फरियादी आते हैं। एक समय यहां का मुख्य व्यवसाय हथकरघा हुआ करता था पर मूलभूत संरचना के अभाव में यहां के कारीगर देश के अन्य भागों में पलायन करने को मजबूर हैं। नगर की निजी बस व्यवस्था एक समय जनपद में सबसे अच्छी मानी जाती थी पर समय के साथ कम लाभ देने के कारण यह भी निम्न स्तर तक गिर चुकी है।

यदि लहरपुर के प्रमुख स्थानो की बात की जाए तो प्रमुख स्थलों में यहाँ कई ऐतिहासिक शिव मंदिर और रामलीला मैदान का कुण्ड अति शोभनीय है जहा प्रतिवर्ष रामलीला का आयोजन किया जाता है | शहर बाज़ार, पराग शाह चौराहा, गुरखेत बाज़ार, मजाशाह चौराहा, पाटन दीन चौराहा, खत्रियाना चौराहा, बिसवां तिराहा, जोशीताल चुंगी आदि हैं।

30 लोकसभा सीतापुर के लहरपुर विधानसभा मे आजादी के करीब 7 दशक बाद भी क्षेत्रवासियों को किसी बड़ी बीमारी के चलते जिला स्तर या मंडल स्तर पर इलाज के लिए जाना पड़ता है । वहीं शिक्षा के क्षेत्र में भी कोई ऐसे विद्यालय का निर्माण ना हो सका जिससे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए क्षेत्रवासियों को सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो और उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में सुनहरे अवसर प्रदान हो सके । यदि बात रोजगार की की जाए तो कोई ऐसा कदम रोजगार के क्षेत्र में नहीं उठा जिससे कि दो वक्त की रोटी क्षेत्रवासी सुकून के साथ अर्जित कर सकें और अपनी जीविका चला सके ।
आधुनिक लहरपुर की बात की जाए जब से लहरपुर की जनता जागरूक हुई तब से यहा अनेक नेता आये और चले गए और तो और लहरपुर के क्षेत्रीय नेता भी लहरपुर से विधायक, सांसद और चेयरमैन भी रहे लेकिन बावजूद उसके लहरपुर की उपरोक्त समस्याओं का हाल वही रहा अब फिर एक बार चुनावी समर तेज़ है आने वाले दिनों में देखना ये होगा की कौन इस समर में राज़ करता है और लहरपुर के लिए कौन क्या करता है ये एक बड़ा सवाल लहरपुर की राजनीति में बना हुआ है।

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