राजस्थान में 12 मार्च के बाद कांग्रेस कभी भी कर सकती है लोकसभा उम्मीदवारों की घोषणा | New India Times

अशफाक कायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान)), NIT:

राजस्थान में 12 मार्च के बाद कांग्रेस कभी भी कर सकती है लोकसभा उम्मीदवारों की घोषणा | New India Timesचुनाव आयोग द्वारा लोकसभा चुनावों के तिथि की घोषणा अभी तक नहीं करने के वावजूद अंदाज लगाया जा रहा है कि राजस्थान में चुनाव अप्रेल माह के शुरुआत में दो चरणों में हो सकते है जबकि कांग्रेस उम्मीदवारों की घोषणाएं इसी बारह मार्च के बाद कभी भी होने की पूरी सम्भावना जताई जा रही है।
कांग्रेस पार्टी के सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि राजस्थान के उम्मीदवार चयन के लिये बनी स्क्रीनिंग कमेटी की 8 मार्च को दिल्ली के कांग्रेस वार रुम में अंतिम बैठक होगी। इस स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी स्वयं करेगे। जबकि राष्ट्रीय संगठन मंत्री के सी वेणुगोपाल, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलेट, प्रभारी महासचिव अविनाश पाण्डे व सीटवार प्रभारी सचिव बैठक में रहकर सभी 25 लोकसभा सीटवार एक पैनल को अंतिम रुप देंगे। जिस पैनल पर 11 मार्च को दिल्ली में आयोजित होने वाली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में चर्चा होने के बाद 12 मार्च को सीडब्ल्यूसी की बैठक में अहम चर्चा होने के बाद लगभग सभी सीटों के उम्मीदवारों के नाम तय करके आवश्यकता अनुसार नामों की सूची की घोषणा करना माना जा रहा है।

राजस्थान में 12 मार्च के बाद कांग्रेस कभी भी कर सकती है लोकसभा उम्मीदवारों की घोषणा | New India Times

भाजपा की तरफ से राजस्थान लोकसभा के होने वाले उम्मीदवारों के नामों पर एक तरह से लगभग काम पूरा कर लिया गया है। पार्टी के सूत्रों के अनुसार विभिन्न सर्वो व पार्टी नेताओं की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान के करीब एक दर्जन मौजूदा सांसदों की छुट्टी करके उनकी जगह नये व जातीय समीकरणों व कांग्रेस उम्मीदवार को मद्देनजर रखते हुये नये चेहरों को उम्मीदवार बना कर सीट जीतने की रणनीति बनाई गई है। भाजपा की भी दिल्ली में 10 मार्च के आस पास बैठक हो सकती है जिसमें एक या दो नामों का पैनल बना लिया जायेगा। मौजूदा भाजपा सांसदों में गंगानगर, झूंझुनू, सीकर, दौसा, बाडमेर, जयपुर व टोंक सवाईमाधोपुर सहित करीब बारह सांसदों की जगह नये उम्मीदवार मेदान में उतारने की चर्चा चल रही है। 2014 के चुनाव में भाजपा ने सभी 25 सीटें जीती थी लेकिन अजमेर के सांसद सावंरमल जाट व अलवर के सांसद बाबा चांदनाथ का देहांत होने पर हुये उपचुनाव में दोनों ही सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार रघू शर्मा व डाॅ कर्ण सिंह यादव चुनाव जीतकर सांसद बन गये थे। वहीं दौसा से भाजपा सांसद हरिस मीणा के पाला बदलकर कांग्रेस की टिकट पर देवली से विधानसभा चुनाव लड़कर विधायक बनकर दौसा सांसद पद से त्याग पत्र दे दिया था। बाडमेर से भाजपा सांसद कर्नल सोनाराम के सांसद रहने बाडमेर विधानसभा सीट पर चुनाव लड़कर हारने से उनकी छवि को दाग लगा है।
राजस्थान के उम्मीदवार चयन को लेकर कल 8 मार्च को कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की होने वाली अंतिम बैठक से पहले अधिकांश उम्मीदवारों व उनके समर्थकों ने दिल्ली में डेरा डालना शूरु कर दिया है। जबकि स्क्रीनिंग कमेटी के तमाम सदस्यों का आज रात तक व कल सुबह तक दिल्ली पहुंचने का कार्यक्रम तय है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मुम्बई में हर्निया का आपरेशन करवा कर जयपुर लौटने के बाद स्वस्थ होकर सीमावर्ती जिलों का दौरा कर चुकने के बाद उनके उक्त मीटिंग में शामिल होने की सम्भावना है।
कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की दिल्ली में कल होने वाली मीटिंग में सभी 25 सीटों के उम्मीदवारों पर गहन छानबीन करके कुछ सीटों पर एक व कुछ पर एक से अधिक दो या तीन नामों के पैनल को अंतिम रुप दिया जायेगा। मोटे तौर पर इसी मीटिंग में यह भी तय कर लिया जायेगा कि राजस्थान से एक सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारा जाये या नही? अगर उतारा जाये तो कौन सी सीट पर उतारा जाये। कांग्रेस के अधिकांश सेक्युलर नेताओं का कहना है कि भारत के एक दूसरे के लगते 9-10 प्रदेशों में से मात्र एक सीट मुस्लिम को राजस्थान में दी जाती है। सेक्युलर पार्टी कांग्रेस अगर यह एक सीट भी मुस्लिम को नहीं देती है तो पार्टी की धर्मनिरपेक्ष छवि को गहरा धक्का लग सकता है। वेसे भी जरूरी नहीं है कि कांग्रेस के सभी उम्मीदवार जीतकर ही आयेंगे। इसके अलावा मुस्लिम को उम्मीदवार नहीं बनाने की चर्चा के चलते चूरु व झूंझुनू से टिकट चाहने वाले मुस्लिम नेताओं ने भी अपनी बात हाईकमान तक पहुंचा कर राजनीतिक दवाब बनाने की कोशिश पिछले तीन-चार दिन में बनाई है जिसके बाद लगता है कि चूरू या फिर झूंझुनू में से एक सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारा जाएगा।

कुल मिलाकर यह है कि दो-चार दिन में चुनाव आयोग कभी भी लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐहलान कर सकता है। लेकिन राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के चयन का काम पहले मुकम्मल करके उसको खूफीया तौर पर दबाये बैठे रहेंगे और ऐन वक्त पर उम्मीदवारों को घोषणा करने का पूराना सिलसिला हर बडे़ राजनीतिक दल कायम रखेंगे। फिर भी छन छन कर आने वाली खबरों से लगभग सम्भावित उम्मीदवार का पता क्षेत्र की जनता व एक दूसरे दल के खूफीया तंत्र को चल ही जाता है।

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