अशफाक कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT:
भारत भर मे फौज के शौर्य व बलिदान को लेकर जनता के दिलों में गहराई तक फौज के प्रति एक तरह का सम्मान हमेशा से पाया जाता रहा है। पिछले एक पखवाड़े में भारतीय फौज द्वारा दूश्मन देश पाकिस्तान को सबक सिखाते हुये उसे कड़ा संदेश देने के बाद भारतीय फौज की एक दफा फिर से सूनेहरी तस्वीर उभर कर विश्व स्तर पर आई है।
राजस्थान के चूरु में 26-फरवरी को भाजपा द्वारा आयोजित अपनी सभा के मंच पर पूलवामा में शहिद हुये सीआरपीएफ के जवानों के फोटो लगाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक के भाषण देने के बाद राजस्थान में भी राजनीतिक माहौल बदला बदला नजर आने लगा है।
भारत में लोकसभा चुनाव के ठीक पहले बन रहे राजनीतिक माहौल को भांपते हुये खासतौर पर भाजपा व कांग्रेस जैसे राजनीतिक दल अपने अपने स्तर पर राजस्थान में अपने जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश नये सिरे से करना शूरु कर दिया है। जिनमें फौज के सेवानिवृत्त आला अधिकारियों को उम्मीदवार बनाने की कोशिश चल रही है हालांकि फौज के सेवानिवृत्त अधिकारी पहले भी राजस्थान में भाजपा व कांग्रेस के उम्मीदवार बनते व जीतते रहे हैं लेकिन दो महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार तय करने को लेकर तीन दिन दिल्ली में मंथन करने के बाद एक मार्च को जयपुर में मेराथन बैठके करने के बाद कांग्रेस पार्टी के सूत्रोनुसार पार्टी अब कुछ चुनिंदा जगह से सेवानिवृत्त फौज के आला अधिकारियों को उम्मीदवार बनाने की सोच रही है। प्रदेश में सबसे अधिक फौजी देने वाले शेखावाटी जनपद के झूंझुनू जिले के लाडले दो साल पहले फौज से लेफ्टिनेंट जनरल पद से रिटायर होकर आने वाले बख्तावरपुरा गांव के अधिकारी के अलावा अन्य अनेक सेवानिवृत्त अधिकारियों के नामों पर भी विचार हो रहा है।
झूंझुनू लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार को लेकर हर स्तर पर सिरफुटव्वल के हालात देखने को कांग्रेस हाईकमान को मिले हैं जिससे एक धड़े के नेता को उम्मीदवार बनाने की हालत में दूसरे धड़े के मामूली से अलग रुख अपनाने के चलते कांग्रेस की लूटिया डूबने के आसार बनने को मद्देनजर रखते हुये कांग्रेस दोनों धड़ों के मध्य एकता व सामंजस्य बनाये रखने के खातिर किसी सेवानिवृत्त आला फौजी अधिकारी को उम्मीदवार बनाने की राजनीतिक हलको मे चर्चा जोरों पर चल रही है।
