आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने कलेक्टरों, कमिश्नरों व बीएलओ के तबादलों पर लगाई रोक, अब चुनाव आयोग की अनुमति के बिना कोई भी सरकार नहीं कर सकती है कलेक्टरों व कमिश्नरों के तबादले | New India Times

संदीप शुक्ला, भोपाल /नई दिल्ली, NIT:

आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने कलेक्टरों, कमिश्नरों व बीएलओ के तबादलों पर लगाई रोक, अब चुनाव आयोग की अनुमति के बिना कोई भी सरकार नहीं कर सकती है कलेक्टरों व कमिश्नरों के तबादले | New India Times

आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने कलेक्टरों व कमिश्नरों के तबादलों पर रोक लगा दी है इसलिए अब चुनाव आयोग की अनुमति के बिना कोई भी सरकार कलेक्टरों व कमिश्नरों के तबादले नहीं कर सकती है।

सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ के मुख्यमंत्री के रुप में शपथ लेते ही कई अफसरों पर तबादले की गाज गिरना तय मानी जा रही थी इनमें लंबे समय से एक ही विभाग में पदस्थ या फिर जो भाजपा सरकार के चहेते अफसर रहे हैं उनके नाम शामिल हैं और अफसरों की बाकायदा सूची भी तैयार की जा चुकी है लेकिन कांग्रेस के इस कवायद पर चुनाव आयोग ने रोक लगा दी है जिसके चलते कांग्रेस बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले नहीं कर पाएगी। हालांकि अगर किसी अधिकारी का तबादला करना होगा तो सरकार को पहले चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी।

दरअसल, तीन महिने बाद लोकसभा चुनाव होना है। इसलिए चुनाव आयोग अभी से तैयारियों में जुट गया है। 26 दिसंबर को मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन होगा, इसके साथ ही नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के दावे-आपत्ति लेने का काम शुरू हो जाएगा। ऐसे में मतदाता सूची तैयार करने के चलते चुनाव आयोग ने कमिश्नर, कलेक्टर से लेकर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के 26 दिसंबर के बाद बिना पूछे तबादले करने पर रोक लगा दी है।

खबर है कि 25 जनवरी तक दावे-आपत्ति लिए जाएंगे और 11 फरवरी के पहले इनका निराकरण किया जाएगा। 18 फरवरी तक मतदाता सूची की तैयारी कर 22 फरवरी को अंतिम प्रकाशन कराया जाएगा। इसी सूची के आधार पर लोकसभा चुनाव होंगे। बताया जा रहा है कि मार्च के पहले पखवाड़े में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग सकती है। इसे देखते हुए चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के काम से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को बिना अनुमति हटाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

इन विभागों में हो सकता है बडा फेरबदल

कांग्रेस के कामकाज संभालते ही गृह, जनसंपर्क, उद्योग और सामान्य प्रशासन विभाग, कृषि, नगरीय प्रशासन, सामान्य प्रशासन, ग्रामीण विकास में बडे स्तर तक अधिकारियों को बदला जाना है। इसके साथ ही प्रशासनिक फेरबदल भी होना तय है। हालांकि प्रशासनिक जमावट नए मुख्य सचिव के चयन के बाद होगी। मुख्यमंत्री की कमान संभालने के बाद कमलनाथ को मुख्य सचिव का चयन करना है। सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा नेताओं के रिश्तेदार अधिकारियों का भी हटना तय है। इन अधिकारियों की पदस्थापना विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की गई थी जिसमें जनसंपर्क के संचालक आईपीएस अधिकारी आशुतोष प्रताप सिंह, नगर निगम भोपाल के आयुक्त अवनीश लवानिया का नाम शामिल है। आशुतोष शिवराज सिंह चौहान के भांजे दामाद हैं, जबकि लवानिया पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के दामाद हैं। अधिकारियों के बदले जाने के साथ साथ विभागों में भी कई तरह से चेंजेंस किए जाएंगें। यहां अब नए सिरे से पूरी जमावट होगा साथ ही माना जा रहा है कि 2019 में होने वाले आम चुनावों के मद्देनजर मुख्य विभागों की जिम्मेदारी भी कुछ खास अधिकारियों को इसी महीने सौंपी जा सकती है। पहली बार में ही कमलनाथ 25 से ज्यादा आईएएस अफसरों को इधर से उधर करने की तैयारी में हैं।

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