नरेंद्र इंगले, ब्यूरो चीफ जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

भारत के संविधान के कारण ही प्रत्येक भारतीय व्यक्ति को सम्मान से जीने का अधिकार हासिल हुआ है। हमारे देश के संविधान ने प्रत्येक नागरीक को हर किस्म की स्वातंत्रता प्रदान करते हुए सभी को अवसर की समानता दी है। सभी लोगों को न्याय भावना से जोडा है और बहुविविधता के बीच भारतीय होने के नाते जनता में आपसी बंधुता को बढावा दिया है इस लिए संविधान में संलिप्त स्वतंत्रता, समता, न्याय और बंधुता इन मूल्यों की परीभाषा बेहद सुक्ष्म तथा उतना ही सरल है, ऐसा प्रतिपादन बहुजन विचारक श्री किशोर तायडे ने किया है . वह 26 नवंबर को लुंबीनी बुद्ध विहार जामनेर मे आयोजित संविधान दिवस के समारोह मे बोल रहे थे।
अपने संबोधन मे श्री तायडे ने संविधान से जुडे उन अनछुए पहलुओ पर भी प्रकाश डाला जिन पर आज भी जनता के बिच कभी कोई खास प्रबोधन नहि हो सका है जैसे कि प्रत्येक नागरीक को संविधान द्वारा प्राप्त मुलभुत अधिकार (fundamental rights ) तथा लोकतंत्र के चार वह स्तंभ ( संसद, प्रशासन, न्यायपालिका, मिडीया) जिन पर भारत कि कामयाब जमुरीयत का विश्व मे गौरव किया जाता रहा है। समारोह में मन्सारामजी इंगले, रमेश सुरवाडे, सचिन सुरवाडे समेत सैकड़ों नागरीक उपस्थित रहे।
