घरों पर लगी तख्तियां: 'हम सामान्य जाति के हैं वोट मांग कर शर्मिंदा न हों' | New India Times

पीयूष मिश्रा/अश्वनी मिश्रा की खास खबर

भोपाल/ सिवनी (मप्र), NIT; ​घरों पर लगी तख्तियां: 'हम सामान्य जाति के हैं वोट मांग कर शर्मिंदा न हों' | New India Timesमध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में अब महज कुछ महीनों का समय रह गया है ऐसे में पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ गठित हुई सपाक्स संगठन ने ऐसा सियासी दांव चला है कि सभी राजनीतिक दलों में हड़कंप मच गया है। सपाक्स के सोशल मीडिया पोस्ट से मध्य प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस की परेशानियां बढ़ना शुरू हो गई हैं। सपाक्स ने कहा है कि हम सामान्य जाति के हैं वोट मांग कर शर्मिंदा ना हों और इस संदेश की पूरे प्रदेश में घरों घर तख्तियां लगाने का काम युद्धस्तर पर जारी हो गया है।

दरअसल सपाक्स संगठन ने इस बार मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारे जाने की घोषणा पहले से ही कर दी है। जिससे प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों की मुश्किल है बढ़ी हुई नजर आ रही हैं। ऐसे समय में इस तरह की सोशल मीडिया की पोस्ट तेजी से वायरल होने की वजह से अब इन राजनीतिक दलों के रणनीतिकार हैरान और परेशान नजर आ रहे हैं।

घरों पर लगाई गई तख्तियां

मध्यप्रदेश में सामान्य वर्ग के लोग अपनी नाराजगी तेजी से जाहिर करने में लगे हुए हैं और प्रदेश के कई जिलों में सामान्य वर्ग के लोगों ने अपने घरों के बाहर तख्तियां लगा कर लिख दिया है कि हम सामान्य जाति के लोग हैं राजनीतिक पार्टियां वोट मांग कर शर्मिंदा न हों। ऐसी पोस्ट तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

आरक्षण है नाराजगी की वजह

मध्यप्रदेश में आरक्षण को लेकर प्रदेश की राजनीति अजाक्स और सपाक्स के बीच बढ़ गई है। सामान्य वर्ग आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग कर रहा है वही सरकार संविधान के अनुसार व्यवस्था का हवाला देकर कुछ भी बोलने से बच रही है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा आरक्षण खत्म ना करने का बयान भी अहम मुद्दा बना हुआ है। इसके अलावा मध्य प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक कांग्रेस पार्टी भी आरक्षण के विषय में कुछ भी कहने से परहेज कर रही है। प्रदेश के जिन घरों में आरक्षण विरोधी पोस्टर लगे हुए हैं वहां सपाक्स संगठन उनसे संपर्क करने में जुटा हुआ है।

आर्थिक आधार पर होना चाहिए आरक्षण

प्रदेश के आम आदमी के साथ साथ राजनीतिक पंडित कारों का मानना है कि आरक्षण आर्थिक आधार पर तय होना चाहिए। ग्वालियर के धीर सिंह सिकरवार का कहना है कि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए आरक्षण जाति देखकर देना है तो वोट भी जाति देख कर ही मांगा जाए। वही क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री सुरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि आरक्षण ऐसा मुद्दा है जिसे छेड़ना भाजपा के लिए खुदकुशी के बराबर है। इस विषय में अंतर्राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के मध्य प्रदेश के मीडिया प्रभारी पंडित पीयूष मिश्रा का कहना है कि आरक्षण की व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए और केंद्र सरकार तथा मध्य प्रदेश सरकार सहित विपक्ष में बैठी कांग्रेस को भी आर्थिक आधार पर हर वर्ग को आरक्षण का लाभ देने के लिए सहमति बनाना चाहिए।

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