कासिम खलील, बुलढाणा (महाराष्ट्र), NIT;
बुलढाणा के एक व्यवसायिक अपने परिवार के साथ पासपोर्ट बनाने के लिए अपनी कार से नागपुर जा रहे थे कि अमरावती के पास रात लगभग 4 बजे कार एक ट्रक से जा टकराई जिसमें सामने बैठी महिला की मौके पर मौत हो गई जबकि व्यवसायिक तथा उनके 3 बच्चे ज़ख़्मी हो गए जिनका इलाज बुलढाणा के अस्पताल में चल रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बुलढाणा निवासी किराणा व्यापारी मो. इमरान मो.इकबाल भोरगामडावाला (40) रमज़ान ईद के बाद पवित्र शहर मक्का-मदीना उमरह के लिए जाने वाले थे इसीलिए पासपोर्ट बनाने के लिए वे 13 मई की रात को अपनी पत्नी व 3 बच्चों को अपनी एसेंट कार में लेकर नागपुर के लिए रवाना हुए थे कि रात में करीब 4 बजे के दौरान अमरावती के पास तेज़ रफ़्तार कार ने सामने खड़े ट्रक को पीछे से टक्कर मार दी, इस हादसे में पत्नी अंजुम बानो मो. इमरान (35) की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि मो. इमरान गंभीर रूप से ज़ख़्मी हो कर बेहोश हो गए। कार में सवार तीनों बच्चे कशिश फ़ातिमा(13), ज़ोया (4) और 6 माह के मो. अशाज़ को भी चोंट लगी हैं। घटना की जानकारी के बाद अमरावती के परिजन घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने जख्मियों को अमरावती के एक निजी अस्पताल में दाखिल किया,जिन्हें कुछ देर बाद बुलढाणा ले जाया गया। रात में 10 बजे पत्नी अंजुम बानो को बुलढाणा के कब्रस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया जबकि अन्य जख्मियों पर उपचार चल रहा है।
कशिश की हिम्मत को सलाम
व्यवसायिक मो. इमरान की कार का अमरावती के पास हादसा होने के बाद इमरान बेहोश हो गए थे जबकि उनकी पत्नी के सिर पर गंभीर मार लगने से वह दम तोड़ चुकी थी। कार में पीछे बैठी 13 वर्षीय पुत्री कशिश अपने माँ-बाप को खून में लहू लहान देख कर पहले तो घबरा गई और उसने मां-बाप को आवाज़ लगाई पर कोई प्रतिसाद नही मिल रहा था ऐसे में अपने दोनों छोटे भाई-बहन को अपने साथ लेकर पास के एक ढाबे पर पहुंची और वहां सोये लोगों को जगा कर अपने साथ घटनास्थल पर मदद के लिए लेकर आई। इतना ही नही कशिश ने मोबाइल से अपने दादा जी को बुलढाणा कॉल कर के हादसे की जानकारी भी दी। इस गंभीर हादसे के बाद कशिश ने जो हिम्मत दिखाई वह काबिल-ए-तारीफ है।
कितनी जाने लगा पासपोर्ट ऑफिस ?
विदर्भ के 11 जिलों के लोगों को पासपोर्ट बनाने के लिए नागपुर जाना पड़ता है। बुलढाणा से नागपुर की दूरी तकरीबन 350 किलोमीटर की है। इतनी दूरी तय करने के लिए लोग अक्सर निजी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। पासपोर्ट बनाने के लिए नागपुर जाते समय अब तक कई सड़क हादसे हो चुके हैं, जिसमे कई लोगों की जानें चली गई हैं और कई लोग विकलांग हो गए हैं। शासन को चाहिए कि हर जिला मुख्यालय पर पासपोर्ट ऑफिस बनाया जाए या फिर कम से कम 2-3 जिलों के लिए एक स्थान पर पासपोर्ट ऑफिस दे ताकि लोगों को लंबे सफर की परेशानी से मुक्ति मिल सके। इस मुद्दे की ओर जनप्रतिनिधियों को भी ध्यान देना चाहिए।

Bilkul buldana ya akola me passport office banna hi chahiye
उमराह को जाना आसान लेकिन पासपोर्ट बनवाना मुश्किल हो गया