अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:
ऑल इंडिया महिला सांस्कृतिक संगठन (AIMSS) की महासचिव साथी छवि मोहंती ने उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी मामले में उनके माता-पिता के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। संगठन ने इस कार्रवाई को न्याय की मांग कर रहे परिवार के साथ अन्याय बताते हुए महिला संगठनों और जनवादी संगठनों से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की है।
संगठन की ओर से जारी प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ने कथित गलत काम के दबाव का विरोध किया था और इस मामले में अपनी जान गंवाई। AIMSS ने इसे सत्ता के दुरुपयोग से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने और मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की जरूरत है।
प्रेस वक्तव्य में मामले के कथित ‘वीआईपी’ एंगल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि इस पहलू की जांच पूरी होने से पहले ही केंद्र सरकार ने भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त कर दिया। संगठन ने संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपाल को मिलने वाली संवैधानिक सुरक्षा का हवाला देते हुए नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की है। उसका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
AIMSS ने अंकिता के माता-पिता के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्याय की मांग कर रहे परिवार को परेशान करने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए। संगठन ने मांग की कि परिवार का कथित उत्पीड़न तत्काल बंद किया जाए और मामले में निष्पक्ष जांच के जरिए जिम्मेदार लोगों को सामने लाया जाए।
AIMSS की तीन प्रमुख मांगें
संगठन ने दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर रोक लगाने, अंकिता भंडारी मामले में कथित ‘वीआईपी’ की पहचान उजागर कर दोषियों को सजा दिलाने तथा अंकिता के माता-पिता का उत्पीड़न बंद करने की मांग की है।
संगठन ने सभी जनवादी और महिला संगठनों से अपील की है कि वे अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय दिलाने की मांग के समर्थन में एकजुट हों और इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवाज उठाएं।

