पीढ़ियों से काबिज़ आदिवासियों की जमीन का अवैध व्यवस्थापन निरस्त कर भूमि वापस दिलाई जाए: उमेश तिवारी; संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आदिवासियों की ज़मीन पर रिसॉर्ट और होमस्टे निर्माण का आरोप, बनास नदी के संरक्षण के लिए आंदोलन की तैयारी | New India Times

मोहम्मद इसहाक़ मदनी, ब्यूरो चीफ मैहर (मप्र), NIT:

पीढ़ियों से काबिज़ आदिवासियों की जमीन का अवैध व्यवस्थापन निरस्त कर भूमि वापस दिलाई जाए: उमेश तिवारी; संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आदिवासियों की ज़मीन पर रिसॉर्ट और होमस्टे निर्माण का आरोप, बनास नदी के संरक्षण के लिए आंदोलन की तैयारी | New India Times

टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने आरोप लगाया है कि सरकार की कॉरपोरेट परस्त नीतियों के कारण आदिवासियों के अस्तित्व और उनके पारंपरिक भूमि अधिकारों पर संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बांध, टाइगर रिजर्व, रिंग रोड, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे ट्रैक जैसी विकास परियोजनाओं के नाम पर आदिवासियों की जमीनें ली गईं, लेकिन इसके बदले उन्हें विस्थापन, बेघर होने और आजीविका के संकट का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, विकास की इन परियोजनाओं से प्रभावित अनेक आदिवासी परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन से दूर होकर मजदूरी करने को मजबूर हुए हैं।

परसिली और आसपास के गांवों की जमीन का व्यवस्थापन निरस्त करने की मांग
उमेश तिवारी ने कहा कि सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व के कारण पीढ़ियों से बसे 54 गांवों के आदिवासियों को उनके जल, जंगल, जमीन और सांस्कृतिक परंपराओं से दूर होना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर परसिली, चमराडोल और आसपास के गांवों में बड़े पैमाने पर रिसॉर्ट और होमस्टे बनाए जा रहे हैं। इनमें से कुछ निर्माण उन जमीनों पर होने का आरोप है, जिन पर आदिवासी परिवार पीढ़ियों से काबिज रहे हैं।
तिवारी के मुताबिक, कुछ लोगों ने कर्मचारियों की कथित मिलीभगत और प्रशासनिक सांठगांठ से आदिवासियों के कब्जे वाली जमीनों का व्यवस्थापन अपने नाम करा लिया और अब उन्हें ऊंची कीमतों पर पूंजीपतियों को बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि फर्जी व्यवस्थापन के मामले विधानसभा में उठाए जाने के बाद कुछ अवैध व्यवस्थापनों को निरस्त किया गया था।

बनास नदी की अविरलता और निर्मलता पर जताई चिंता
उमेश तिवारी ने बनास नदी के किनारे नियमों की अनदेखी कर रिसॉर्ट और होमस्टे बनाए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के निर्माण से नदी की अविरलता और निर्मलता प्रभावित होने का खतरा है। उनके अनुसार, बनास नदी का संबंधित क्षेत्र सोन-घड़ियाल अभयारण्य के संरक्षण क्षेत्र में आता है।
उन्होंने दावा किया कि अभयारण्य क्षेत्र में नदी के दोनों किनारों से 1,200 मीटर के दायरे में निर्माण और उत्खनन पर प्रतिबंध है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने संबंधित विभाग के कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
तिवारी ने मांग की कि संरक्षित क्षेत्र में नियमों के विपरीत बने रिसॉर्ट और होमस्टे की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा अवैध निर्माण हटाकर बनास नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण को सुरक्षित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासियों के भूमि अधिकारों की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के मुद्दे पर प्रभावित लोगों से चर्चा के बाद आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।

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