नाबालिग़ से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 20 साल का सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माना, वसई पुलिस की प्रभावी जांच और ठोस साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुनाई सज़ा | New India Times

साबिर खान, वसई-विरार/मुंबई (महाराष्ट्र), NIT:

वसई पुलिस थाने की सीमा में नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के गंभीर मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय के अंतर्गत वसई पुलिस की प्रभावी जांच, चिकित्सकीय साक्ष्यों और गवाहों की गवाही के आधार पर यह फैसला सुनाया गया।
पुलिस के अनुसार, 4 नवंबर 2020 को वसई पुलिस थाना क्षेत्र की एक सोसायटी में नाबालिग बच्ची के रोने और घबराई हुई अवस्था में होने की जानकारी स्थानीय निवासियों को मिली। इसके बाद स्थानीय लोगों ने ठाणे पश्चिम स्थित एक सामाजिक संस्था के प्रतिनिधियों को इसकी सूचना दी। संस्था के प्रतिनिधियों ने पीड़िता से बातचीत की और उनकी शिकायत के आधार पर वसई पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया।

पीड़िता की चिकित्सकीय जांच कराई गई, जिसमें उसके साथ यौन अपराध होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय साक्ष्य जुटाए गए तथा न्यायवैज्ञानिक जांच के लिए जरूरी नमूने और अन्य सामग्री प्रयोगशाला भेजी गई।
पुलिस ने पीड़िता के बयान, चिकित्सकीय साक्ष्य, आसपास के निवासियों और संबंधित चिकित्सकीय अधिकारियों की गवाही सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए। जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
इस मामले की सुनवाई वसई स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायालय में विशेष मुकदमा क्रमांक 188/2020 के तहत हुई। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्रीमती बी. एच. काशिकर ने 4 अक्टूबर 2026 को आरोपी लॉरेंस जॉन राजू मट्टा (58), निवासी टेन्सी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी, ग्रीनकोर्ट, वसई (पश्चिम), जिला पालघर को दोषी ठहराते हुए विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई।

अदालत ने बालकों का लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO Act), 2012 की संबंधित धाराओं के तहत आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया। अन्य संबंधित धाराओं के तहत भी सजा सुनाई गई, जो निर्धारित विवरण के अनुसार साथ-साथ चलेंगी।
इस मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई। पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक, अपर पुलिस आयुक्त संजय शिंदे, पुलिस उपायुक्त अशोक विरकर और सहायक पुलिस आयुक्त देवेंद्र पोळ के मार्गदर्शन में वसई पुलिस थाने की प्रभारी पुलिस निरीक्षक सौरभी पवार तथा सरकारी वकील जयप्रकाश पाटील की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
जांच अधिकारी पुलिस उपनिरीक्षक अमोल गर्जे और पुलिस थाने के अन्य संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मामले में साक्ष्य जुटाने से लेकर न्यायालयीन प्रक्रिया तक महत्वपूर्ण योगदान दिया। पुलिस आयुक्तालय ने इस कार्रवाई को नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों के मामलों में प्रभावी जांच और न्यायिक पैरवी का उल्लेखनीय उदाहरण बताया।

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