फैज़ान खान, गुरुग्राम/नई दिल्ली, NIT:

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नीतियों और ईवीएम के विरोध को लेकर चर्चा में रहने वाले भीमसेना प्रमुख एवं संविधान सुरक्षा पार्टी (एसएसपी) के सुप्रीमो नवाब सतपाल तंवर की पुलिस सुरक्षा में कटौती किए जाने का मामला सामने आया है। तंवर ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन पर राजनीतिक प्रतिशोध, जातिवाद और भाजपा के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है।
तंवर के अनुसार, पिछले वर्ष उनकी सुरक्षा पूरी तरह हटा दी गई थी। इसके बाद विरोध और खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस सुरक्षा बहाल करते हुए दो गनमैन तैनात किए गए थे। अब उनकी सुरक्षा में तैनात गनमैन की संख्या घटाकर एक कर दी गई है। उनका आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित आदेश की जानकारी दिए यह कदम उठाया है।
तंवर और उनके समर्थकों का कहना है कि सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने तथा भाजपा विरोधी आंदोलनों में सक्रिय रहने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उनका दावा है कि उन्हें पूर्व में कई आपराधिक गिरोहों और असामाजिक तत्वों से जान से मारने की धमकियां मिल चुकी हैं। इसके अलावा, उन पर कई बार जानलेवा हमले होने की बात भी कही गई है।
सतपाल तंवर ने वीडियो बयान जारी कर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 10 अक्टूबर को गुरुग्राम पुलिस ने जान के खतरे का हवाला देते हुए सुरक्षा कारणों से उन्हें दिल्ली जाने से रोक दिया था और नजरबंद कर लिया था। ऐसे में अब उनकी सुरक्षा घटाए जाने का फैसला समझ से परे है। उन्होंने सवाल किया कि जब पहले उनकी जान को खतरा बताया जा रहा था, तो अब ऐसा क्या बदल गया कि सुरक्षा कम कर दी गई? तंवर ने इस फैसले के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश होने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
समर्थकों में नाराज़गी
सुरक्षा में कटौती के फैसले की भीमसेना और संविधान सुरक्षा पार्टी ने कड़ी निंदा की है। समर्थकों का कहना है कि जब उनके नेता की जान को खतरा होने की बात पहले सामने आ चुकी है, तो ऐसे में सुरक्षा कम करना चिंताजनक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सतपाल तंवर के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसके लिए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार होंगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्राइम ब्रांच और पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों की ओर से भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। फिलहाल, सुरक्षा में कटौती को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। भीमसेना ने इस फैसले के विरोध में आगे की रणनीति तैयार करने की बात कही है।

