त्रिवेंद्र जाट, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

सागर जिले की देवरी विधानसभा क्षेत्र के गौरझामर, महाराजपुर, सहजपुर, टड़ा और केसली क्षेत्र में संचालित शासकीय छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विद्यार्थियों की सुरक्षा, छात्रावास अधीक्षकों की रात्रिकालीन उपस्थिति, शासकीय राशि के उपयोग और विभागीय अधिकारियों के निरीक्षण की स्थिति की जांच की मांग की जा रही है।
मध्यप्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग की छात्रावास योजनाओं के तहत विद्यार्थियों को आवास, भोजन, बिजली-पानी, फर्नीचर, बिस्तर सामग्री, पुस्तकालय सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। ऐसे में छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों की नियमित देखरेख और सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है।
रात्रि में अधीक्षकों की मौजूदगी पर सवाल
क्षेत्र से यह आरोप सामने आ रहा है कि कुछ छात्रावासों के अधीक्षक रात्रि के समय छात्रावास परिसर में मौजूद रहने के बजाय अपने घरों से व्यवस्था संचालित करते हैं। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता की पुष्टि के लिए विभाग द्वारा रात्रिकालीन औचक निरीक्षण किया जाना जरूरी है। निरीक्षण के दौरान अधीक्षकों की उपस्थिति, विद्यार्थियों की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित अभिलेखों की जांच की जा सकती है।
यदि संबंधित नियमों के तहत अधीक्षकों का छात्रावास में रात्रि निवास अथवा निर्धारित समय पर उपस्थित रहना अनिवार्य है, तो इसकी वास्तविक स्थिति रात्रिकालीन निरीक्षण से स्पष्ट हो सकती है।
सरकारी राशि के उपयोग का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
छात्रावासों में भोजन, सामग्री, रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं के लिए शासन द्वारा राशि उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में वित्तीय वर्ष 2025-26 में देवरी विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक छात्रावास को कितनी राशि आवंटित हुई, कितनी राशि खर्च की गई और किन मदों में खर्च की गई, इसकी जानकारी सार्वजनिक किए जाने की मांग उठ रही है।
प्रशासन से आवंटन आदेश, व्यय विवरण, बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर, भोजन व्यवस्था के रिकॉर्ड तथा भुगतान संबंधी दस्तावेजों का मिलान कराने की मांग की गई है, ताकि शासकीय राशि के उपयोग की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
अधिकारियों के निरीक्षण की भी हो जांच
विभागीय निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मांग की जा रही है कि सागर जिले के जनजातीय कार्य विभाग के संबंधित अधिकारियों द्वारा देवरी क्षेत्र के छात्रावासों का पिछले एक वर्ष में कितनी बार निरीक्षण किया गया, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए। निरीक्षण पंजिका में दर्ज कमियों और उन पर की गई कार्रवाई का भी परीक्षण किया जाना चाहिए।
रात्रिकालीन औचक निरीक्षण से सामने आएगी स्थिति
क्षेत्रवासियों का कहना है कि छात्रावासों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए दिन के बजाय रात में औचक निरीक्षण अधिक प्रभावी रहेगा। निरीक्षण के दौरान अधीक्षक की मौजूदगी के साथ भोजन, साफ-सफाई, बिजली-पानी, विद्यार्थियों की सुरक्षा और आवश्यक अभिलेखों की जांच की जा सकती है। साथ ही पिछले वित्तीय वर्ष के बजट और खर्च का भौतिक सत्यापन एवं वित्तीय जांच कराने से सरकारी राशि के उपयोग की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।
छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभाग से निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करने तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जा रही है।

