रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

गुरुपद तप के उपलक्ष्य में स्थानीय जैन तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में त्रिदिवसीय भक्ति महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। पुण्य सम्राट के पट्टधर पूज्य गच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय नित्यसेनसूरीश्वरजी म.सा. एवं आचार्य श्री जयरत्नसूरीश्वरजी महाराज साहेब की आज्ञानुवर्ती साध्वी श्री शशिकलाश्रीजी म.सा. की सुशिष्या परम विदुषी साध्वी श्री अविचलदृष्टाजी म.सा. आदि ठाणा-7 की पावन निश्रा में आयोजित इस महोत्सव में 36 दिवसीय गुरुपद तप की आराधना पूर्ण करने वाले 47 तपस्वियों की तपस्या का अनुमोदन किया गया।

महोत्सव के अंतर्गत सभी तपस्वियों के पारणे के पश्चात आदिनाथ भगवान की भव्य रथयात्रा एवं तपस्वियों की विराट शोभायात्रा निकाली गई। धार्मिक आस्था, भक्ति, उल्लास और तप अनुमोदना से ओतप्रोत शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं एवं समाजजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान तपस्वियों का पाद प्रक्षालन, अक्षत से वधावना एवं बहुमान कर उनकी दीर्घ तपस्या की अनुमोदना की गई।

दूध से हुआ तपस्वियों का पाद प्रक्षालन
सभी तपस्वियों के दूध से पाद प्रक्षालन का लाभ श्रीमती ज्योति सुरेशजी कांकरिया परिवार, थांदला ने लिया। इसके पश्चात श्रीमती चंदनबाला चंद्रशेखरजी जैन एवं मनोज-मुकेश नाकोड़ा परिवार ने सभी तपस्वियों का अक्षत से वधावना कर उनकी तपस्या की अनुमोदना की।
47 तपस्वियों का हुआ भव्य पारणा
महोत्सव के अंतर्गत प्रातः 8 बजे से सभी तपस्वियों का पारणा प्रारंभ हुआ। तपस्वी सीमा मेहता के तप की अनुमोदना के निमित्त पारणे का संपूर्ण लाभ राजेंद्र प्रसाद-राकेश कुमार मेहता परिवार ने लिया।
आदिनाथ भगवान की भव्य रथयात्रा ने बांधा श्रद्धा का समां
प्रातः 10 बजे बावन जिनालय से आदिनाथ भगवान की भव्य रथयात्रा प्रारंभ हुई। भगवान को रथ में विराजमान कर तपस्वी स्वाति संघवी बैठीं, जबकि भगवान के सारथी के रूप में तपस्वी सपना संघवी विराजमान थीं। भगवान के दोनों ओर तपस्वी वेद कोठारी एवं दीर्घ संघवी चंवर ढुला रहे थे।
शोभायात्रा की पहली बग्गी में अभिधान राजेंद्र कोष लेकर जितेंद्र-भरत बाबेल परिवार की तपस्वी बहनें विराजमान थीं। दूसरी बग्गी में दादा गुरुदेव की तस्वीर लेकर कमलेश कुमार-प्रमोद कुमार भंडारी परिवार की बहनें चल रही थीं। तीसरी बग्गी में पुण्य सम्राट की तस्वीर लेकर श्रीमती लीलाबेन शांतिलालजी भंडारी परिवार की तपस्वी बहनें विराजमान थीं।
चौथी बग्गी में चारित्र के उपकरण लेकर सार्थक कुमार-राजेश कुमार मेहता परिवार के सदस्य विराजमान थे। इस दौरान मार्ग में स्थान-स्थान पर वस्त्र सहित विभिन्न वस्तुओं का वर्षीदान कर धर्मलाभ लिया गया।
श्रीसंघ के युवा उत्साहपूर्वक आदिनाथ भगवान का रथ खींच रहे थे। वातावरण में “तपस्वियों की जय” और “आदिनाथ भगवान की जय” के जयघोष गूंज रहे थे। शोभायात्रा में श्रावक वर्ग सबसे आगे चल रहा था, जबकि साध्वीजी भगवंत के साथ श्राविकाएं चल रही थीं। नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई शोभायात्रा पुनः जिनालय पहुंची, जहां इसका समापन भव्य धर्मसभा के रूप में हुआ।
अभिधान राजेंद्र कोष की हुई स्थापना
महोत्सव में अभिधान राजेंद्र कोष की स्थापना का लाभ श्रीमती मांगूबेन शांतिलालजी सकलेचा परिवार ने लिया। अभिधान राजेंद्र कोष को राजेंद्र मेहता एवं हस्तिमल संघवी परिवार द्वारा स्वर्ण एवं चांदी के पुष्पों से वधाया गया। वहीं गुरुदेव एवं साध्वीजी भगवंत को केसर एवं अक्षत से वधावना करने का लाभ पुण्य सम्राट परिवार ने लिया।
“दादा गुरुदेव का प्रभाव प्रत्यक्ष दिखाई दे रहा है”
धर्मसभा को संबोधित करते हुए परम विदुषी साध्वी श्री अविचलदृष्टाजी म.सा. ने कहा कि दादा गुरुदेव श्री राजेंद्रसूरीश्वरजी महाराज साहेब का प्रभाव आज प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे रहा है। उनके नाम मात्र के स्मरण से विघ्न दूर हो जाते हैं। दादा गुरुदेव की द्विजन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में 47 तपस्वियों द्वारा 36 दिवसीय दीर्घ तपस्या पूर्ण करना गुरुदेव की कृपा और प्रभाव का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
तप की महत्ता बताते हुए साध्वीजी ने कहा कि तप आत्मा की निर्मलता का श्रेष्ठ साधन है। तप के माध्यम से आत्मा पर लगे निकाचित कर्मों का क्षय होता है और आत्मा धीरे-धीरे कर्मबंधन से मुक्त होकर निर्मलता की ओर अग्रसर होती है। तप केवल शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि आत्मा को भीतर से जागृत एवं शुद्ध करने की साधना है।
नन्हे बच्चों ने गीतों से की तपस्वियों की अनुमोदना
धर्मसभा में पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चों चहेती पगारिया, गर्वी राठौर, परी, वंशिका रूनवाल, दृश्या कांठी, जेनिका राठौर आदि ने मधुर गीतों की प्रस्तुति देकर तपस्वियों की भावपूर्ण अनुमोदना की। बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित समाजजनों का मन मोह लिया।
तपस्वियों एवं लाभार्थी परिवारों का हुआ बहुमान
गुरु तप के सभी तपस्वियों का शाल, श्रीफल एवं तिलक से बहुमान करने का लाभ श्रीमती प्रतिभा राजेंद्रजी जैन, बानापुरा वालों ने लिया। सभी तपस्वियों को प्रभावना भी प्रदान की गई। परिषद परिवार की ओर से भी तपस्वियों का बहुमान किया गया।
महोत्सव के सभी लाभार्थी परिवारों का बहुमान मधुकरजी निशांत शाह परिवार द्वारा किया गया। कार्यक्रम के पश्चात समाजजनों के लिए साधार्मिक वात्सल्य का आयोजन किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं एवं समाजजन उपस्थित रहे।
11 उपवास की तपस्वी का भी हुआ बहुमान
11 उपवास की तपस्वी श्रीमती अमिता अंतिमजी पोखरना का शाल, श्रीफल एवं तिलक से मधुकरजी निशांतजी शाह परिवार की श्राविकाओं द्वारा बहुमान किया गया।
श्रीसंघ अध्यक्ष एवं चातुर्मास समिति अध्यक्ष ने की तपस्वियों की अनुमोदना
इस अवसर पर श्रीसंघ अध्यक्ष संजय मेहता एवं चातुर्मास समिति अध्यक्ष ने अपने शब्दों के माध्यम से सभी तपस्वियों की दीर्घ एवं कठिन तपस्या की भावपूर्ण अनुमोदना की। उन्होंने कहा कि 36 दिवसीय गुरुपद तप पूर्ण करना आत्मबल, श्रद्धा और संयम की अद्भुत मिसाल है। तपस्वियों की आराधना से संपूर्ण जैन समाज को आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त हुई है।
इन तपस्वियों ने पूर्ण की 36 दिवसीय गुरुपद तपस्या
कमलेश भंडारी, धर्मचंद मेहता, विवेक बागरेचा, सोना कटकानी, कमलाबेन मुथा, भारती नाहटा, अलका बागरेचा, मीनल बाबेल, उषा बाबेल, सोनल बाबेल, सरिता बाबेल, सुनीता बाबेल, सरोज सेठिया, किरण भंडारी, शिरोमणि राठौर, मंजू लोढ़ा, सीमा मेहता, निर्मला पगारिया, वीणा कटारिया, शीला कटारिया, पुष्पा नाहटा, स्वाति संघवी, मंजू संघवी, हंसा कोठारी, श्वेता सकलेचा, रीटा राठौर, प्रेमलता राठौर, मोनिका कोठारी, सुषमा जैन, सपना संघवी, निक्की छाजेड़, प्राची बरडिया, निशि छाजेड़, समृद्धि पगारिया, स्वीकृति कोठारी, तन्वीबेन, शकुंतला रूनवाल, आशा कटारिया, कामिनी भंडारी, अनुपमा मेहता, शोभा कांकरेचा, सविता रूनवाल, प्रमिला रूनवाल, उषा बाठिया, सरोज सकलेचा एवं रानी रूनवाल ने 36 दिवसीय गुरुपद तप की आराधना पूर्ण की।
भक्ति, तप, त्याग और अनुमोदना से सराबोर इस आयोजन ने झाबुआ की धर्मनगरी में आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण निर्मित किया। आयोजन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को तप, त्याग एवं संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

