मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

ग्राम पंचायत मोरछी से शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। गांव का शासकीय प्राथमिक स्कूल पिछले करीब डेढ़ वर्षों से एक किराए के जर्जर मकान (टपरे) में संचालित किया जा रहा था। यहां करीब 60 से 70 छात्र-छात्राएं पढ़ाई करने को मजबूर थे।
ग्रामीणों के अनुसार, बच्चों को रोजाना करीब डेढ़ से दो किलोमीटर की दूरी तय कर अस्थायी स्कूल भवन तक पहुंचना पड़ता था। जर्जर टपरे की हालत खराब होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी लगातार चिंता बनी हुई थी और किसी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।
अधिकारियों से संपर्क के बाद आनन-फानन में बदली व्यवस्था
मामले को लेकर ग्राम सचिव से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि मूल स्कूल भवन जर्जर होने के कारण बच्चों की कक्षाएं किराए के भवन में संचालित की जा रही थीं। वहीं, जब इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से दूरभाष के माध्यम से जानकारी ली गई और स्कूल की व्यवस्था को लेकर सवाल किए गए, तो प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की।
इसके बाद ग्राम सचिव द्वारा स्कूल को पंचायत भवन में शिफ्ट कराया गया। मौके पर निरीक्षण के दौरान पंचायत भवन में एक संविदा शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हुए भी मिले।
बीईओ कार्यालय में मौजूद थे प्रधानाध्यापक
स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर प्रधानाध्यापक से फोन पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि वे शासकीय कार्य के सिलसिले में बीईओ (खंड शिक्षा अधिकारी) कार्यालय गए हुए हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर डेढ़ साल तक बच्चों को जर्जर भवन में पढ़ने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा? ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल के लिए जल्द से जल्द स्थायी और सुरक्षित भवन की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित एवं सुचारू शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

