नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र की सबसे गैर ज़िम्मेदार नगर निकाय के लिए जामनेर नगर परिषद का नाम किराए के किसी बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज़ किया जाना ज़रूरी हो गया है। तीन-चार दिन की बारिश से पनपे घास-पुस ने पूरे गांव- खेड़े को बीमार करना शुरू कर दिया है। इंसानी चमड़ी के रंग से मेल खाने वाले मच्छर तेजी से टायफाइड – मलेरिया फैला रहे हैं। आरोग्य सेवा के तजुर्बेकार बता रहे हैं कि ऐसा हि चलता रहा तो जामनेर में डेंगू की जबरदस्त लहर आ सकती है। नगर परिषद प्रशासन के नाकामी के लिए किसी की कोई ज़िम्मेदारी नहीं जब की जनता को मेयर साधना महाजन से उम्मीद है।
लोगों ने देखा कि बीजेपी के नगर सेवकों ने फोटो सेशन के लिए फेंगिंग मशीन चलाई जो बाद में कबाड़ख़ाने में जमा कर दी। मंत्री गिरीश महाजन द्वारा कट प्रैक्टिस के आरोप झेलने वाले निजी अस्पतालों में बुखार पीड़ितों की भीड़ होने लगी है। तीस साल से सरकारी तिज़ोरी से मरीजों की आरोग्य सेवा और गरीबों को मुफ़्त में मंदिर दर्शन करवाने वाले गिरीश महाजन अपने गांव को एक आधुनिक सरकारी अस्पताल नहीं दे पाए हैं। नगर परिषद में नेता विपक्ष जावेद मुल्लाजी किसी समस्या पर हल्ला मचाते हैं तब सत्ता पक्ष की ओर से वोटर्स को याद दिलाया जाता है कि उन्होंने अपने वोट के अधिकार का गलत इस्तेमाल किया है। जलगांव मनपा में देखा जा सकता है कि सत्ताधारी बीजेपी के पार्षद इच्छाधारी विपक्ष बनकर खुद को जनता पर थोप रहे हैं।
हर छह महीने बाद तीन स्वीकृत पार्षद :
बीजेपी ने पहले तीन मे से दो स्वीकृत नगर सेवकों हटाकर प्रमोद कोठारी , चंद्रकांत शिंदे को नगर सेवक के पद पर नियुक्त किया है। प्रल्हाद सोनवने को पूरा एक साल मिल सकता है। अगले चार साल में बीजेपी 24 नए चेहरों को नगर सेवक बनाने के मूड में है। समाज का दिमागी नक्सल खेमा स्वीकृत नगर सेवकों को बीजेपी के अग्निवीर करार दे रहा है। मजे की बात तो ये है कि पिछले दरवाजे से राज्यसभा विधान परिषद में चुनकर जाने वाले विपक्षी नेताओं का मंत्री गिरीश महाजन हमेशा यह कहकर मजाक बनाते आए हैं कि उनकी जनता के बीच से चुनकर आने की औकात नहीं है। विदित हो कि नगर परिषद में किसी भी पार्टी द्वारा मनोनीत किए जाने वाले स्वीकृत सदस्य को सदन के भीतर लिए जाने वाले नीतिगत फैसलों की प्रक्रिया में कोई स्थान नहीं होता है।

