रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:
दुनिया भर के मुसलमानों के साथ झाबुआ के दाऊदी बोहरा समुदाय ने पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.) की जयंती मिलाद-उन-नबी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया।
इस अवसर पर निकाले गए जुलूस में शहर के विभिन्न मोहल्लों से आए समुदाय के सदस्यों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जुलूस की शुरुआत शाम 4:30 बजे आजाद चौक स्थित बोहरा मस्जिद से हुई। जुलूस चंद्रशेखर आजाद मार्ग, थांदला गेट, रूनवाल बाजार, जैन मंदिर, लक्ष्मीबाई मार्ग, राजवाड़ा, नेहरू मार्ग, सरदार भगत सिंह मार्ग और बाबेल चौराहा होते हुए पुनः बोहरा मस्जिद पहुंचकर संपन्न हुआ।
जुलूस की अगुवाई दो बाइक एस्कॉर्ट्स ने की। उनके पीछे चार घुड़सवार और उसके बाद एक आकर्षक लाल कार चल रही थी, जिसमें मदरसा हातिमिया के बच्चे सवार थे। इसके बाद समुदाय के लोग अनुशासित कतारों में गरिमा और व्यवस्था का परिचय देते हुए जुलूस में शामिल हुए। स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए बुरहानी गार्ड्स झाबुआ के स्वयंसेवकों ने यातायात और भीड़ नियंत्रण में सहयोग किया।
जुलूस में समुदाय का पारंपरिक इज्जी स्काउट बैंड भी शामिल रहा।
शहर सहित दुनिया भर में दाऊदी बोहरा समुदाय के लोग अपनी स्थानीय मस्जिदों और सामुदायिक केंद्रों में 52वें धर्मगुरु दिवंगत सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के रिकॉर्ड किए गए प्रवचन को सुनने के लिए एकत्र हुए। पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.) के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित इस प्रवचन में अपनी जड़ों और पहचान से जुड़े रहते हुए शिक्षा प्राप्त करने के महत्व पर बल दिया गया। विशेष रूप से दैनिक नमाज और कुरान के पाठ के माध्यम से चरित्र निर्माण पर जोर दिया गया।
इसी कड़ी में समाज द्वारा प्रोजेक्ट राइज के तहत राहगीरों के लिए नाश्ते की व्यवस्था की गई। फैजुल मवाइद बुरहानिया के किचन में पोहे तैयार कर लोगों को परोसे गए। करीब 500 लोगों ने इस सामूहिक नाश्ते का लाभ लिया।
स्थानीय सामुदायिक समन्वयक अब्बास भाई झाबुआवाला ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.) का जीवन और उनकी शिक्षाएं करुणा, न्याय और मानवता के मूल्यों पर केंद्रित हैं, जो हर मुसलमान के लिए मार्गदर्शक प्रकाश हैं। हमें अपने दैनिक जीवन में इन शिक्षाओं को अपनाने और समाज में सकारात्मक योगदान देने वाले जिम्मेदार एवं उत्पादक नागरिक बनने की निरंतर प्रेरणा मिलती है।

