तारिक़ खान, ब्यूरो चीफ, रायसेन (मप्र), NIT:

कलेक्टर के निर्देशानुसार एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश खत्री के मार्गदर्शन में विकासखंड ओबेदुल्लागंज के ग्राम तजपुरा, करीतलाई, विनायका एवं बरखेड़ा स्थित प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में राष्ट्रीय फ्लोरोसिस निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया गया।शिविर में जिला फ्लोरोसिस नोडल अधिकारी डॉ. एम.डी. भारती तथा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम के डॉ. सुरेंद्र राजपूत एवं डॉ. पूनम ओड सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बच्चों का फ्लोरोसिस परीक्षण किया। जांच के दौरान कई बच्चे संभावित डेंटल फ्लोरोसिस से प्रभावित पाए गए। प्रभावित बच्चों के यूरिन सैंपल टेक्नीशियन द्वारा लिए गए। साथ ही, जिन स्रोतों का पानी बच्चे पी रहे हैं, उन स्रोतों के पानी के नमूने भी लिए गए। इन नमूनों की जांच जिला चिकित्सालय स्थित फ्लोरोसिस लैब में की जाएगी।

शिविर में जिला फ्लोरोसिस नोडल अधिकारी डॉ. एम.डी. भारती तथा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम के डॉ. सुरेंद्र राजपूत एवं डॉ. पूनम ओड सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बच्चों का फ्लोरोसिस परीक्षण किया। जांच के दौरान कई बच्चे संभावित डेंटल फ्लोरोसिस से प्रभावित पाए गए। प्रभावित बच्चों के यूरिन सैंपल टेक्नीशियन द्वारा लिए गए। साथ ही, जिन स्रोतों का पानी बच्चे पी रहे हैं, उन स्रोतों के पानी के नमूने भी लिए गए। इन नमूनों की जांच जिला चिकित्सालय स्थित फ्लोरोसिस लैब में की जाएगी।

संभावित डेंटल फ्लोरोसिस से प्रभावित सभी बच्चों को चिन्हित कर आवश्यक उपचार के लिए कैल्शियम, विटामिन-सी एवं मल्टीविटामिन की दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।
डॉ. भारती ने ग्रामीणों, स्कूल शिक्षकों एवं बच्चों को फ्लोरोसिस बीमारी के संबंध में पंपलेट एवं पोस्टर के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी तथा बीमारी से बचाव के उपाय बताए। उन्होंने बताया कि दवाइयों के साथ दैनिक आहार में दूध, दही एवं हरी सब्जियों का अधिक सेवन करना चाहिए। साथ ही पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1 पीपीएम से अधिक होने पर ऐसे पानी का उपयोग पेयजल के रूप में नहीं करना चाहिए।
डॉ. भारती ने ग्रामीणों, स्कूल शिक्षकों एवं बच्चों को फ्लोरोसिस बीमारी के संबंध में पंपलेट एवं पोस्टर के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी तथा बीमारी से बचाव के उपाय बताए। उन्होंने बताया कि दवाइयों के साथ दैनिक आहार में दूध, दही एवं हरी सब्जियों का अधिक सेवन करना चाहिए। साथ ही पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1 पीपीएम से अधिक होने पर ऐसे पानी का उपयोग पेयजल के रूप में नहीं करना चाहिए।उन्होंने बताया कि अधिक फ्लोराइडयुक्त पानी के लंबे समय तक सेवन से फ्लोरोसिस होने की आशंका रहती है। इसके प्रमुख प्रकारों में डेंटल फ्लोरोसिस, स्केलेटल फ्लोरोसिस एवं नॉन-स्केलेटल फ्लोरोसिस शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि अधिक फ्लोराइडयुक्त पानी के लंबे समय तक सेवन से फ्लोरोसिस होने की आशंका रहती है। इसके प्रमुख प्रकारों में डेंटल फ्लोरोसिस, स्केलेटल फ्लोरोसिस एवं नॉन-स्केलेटल फ्लोरोसिस शामिल हैं।
शिविर के दौरान शिक्षक, ग्रामीणजन तथा स्वास्थ्य विभाग के सीएचओ, एएनएम, आंगनवाड़ी एवं आशा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

