मक़सूद अली, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:
धामनगांव रोड स्थित ‘जीवन विकास मतिमंद विद्यालय’ के संचालन को लेकर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, संस्था में नियुक्ति प्रक्रिया, विद्यार्थियों की संख्या, उपलब्ध सुविधाओं तथा सरकारी अनुदान के उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नर्स को नियुक्ति नहीं देने का आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि वर्ष 2014-15 में नर्स धनोरे की नियुक्ति नियमानुसार हुई थी तथा उन्हें नियुक्ति की मंजूरी और वेतन भी प्राप्त हुआ। बाद में उन्हें सेवा से हटाकर उनके स्थान पर दूसरी नर्स की नियुक्ति किए जाने का आरोप है। धनोरे द्वारा इस मामले में उच्च न्यायालय की शरण लेने और न्यायालय से राहत मिलने के बावजूद उन्हें सेवा में वापस नहीं लेने का आरोप शिकायत में लगाया गया है। इससे एक स्वीकृत पद पर दो दावेदार होने का विवाद सामने आया है।
विशेष बच्चों के लिए जरूरी सुविधाओं पर सवाल
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विद्यालय में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं और संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, देखभाल और शिक्षा से संबंधित निर्धारित मानकों के पालन की भी जांच कराने की मांग की गई है।
विद्यार्थियों की संख्या और सरकारी अनुदान की जांच की मांग
विद्यालय में वास्तविक विद्यार्थियों की संख्या और सरकारी अभिलेखों में दर्ज संख्या का मिलान कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विद्यार्थियों की संख्या को लेकर अनियमितता हो सकती है और इसी आधार पर सरकारी अनुदान के उपयोग की भी जांच आवश्यक है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
शिकायत में संस्था प्रबंधन के साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। कुछ अधिकारियों और संस्था से जुड़े व्यक्तियों पर आर्थिक लेन-देन के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
विभागीय आयुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने विभागीय आयुक्त कार्यालय तथा समाज कल्याण विभाग से मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही नियुक्तियों, विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या, सरकारी अनुदान, विद्यालय की सुविधाओं तथा न्यायालयीन आदेशों के अनुपालन की दस्तावेजों के आधार पर जांच कराने की मांग की गई है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित संस्था पदाधिकारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

