मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

शहर की ऐतिहासिक एवं राज्य संरक्षित पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण को लेकर संविधान सुरक्षा समिति, जिला बुरहानपुर के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जहीर उद्दीन शेख ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बुरहानपुर कलेक्टर, पुरातत्व विभाग के प्रभारी अधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत भेजकर राज्य संरक्षित ऐतिहासिक स्मारक सिंधीपुरा गेट के रंग में किए गए कथित परिवर्तन पर आपत्ति दर्ज कराई है।

उन्होंने सिंधीपुरा गेट के मूल स्वरूप को बहाल करने तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई एवं आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।
सिंधीपुरा गेट के रंग परिवर्तन पर आपत्ति
शिकायत में बताया गया है कि बुरहानपुर शहर का ऐतिहासिक परकोटा एवं उसके छह द्वार—इतवारा गेट, सिंधीपुरा गेट, लोहारा मंडी गेट, शनवार गेट, राजपुरा गेट और शिकारपुरा गेट—शहर की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहर हैं। इन स्मारकों के रखरखाव एवं सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित विभाग एवं नगर निगम द्वारा निभाई जाती है।
वरिष्ठ अधिवक्ता जहीर उद्दीन शेख ने शिकायत में उल्लेख किया है कि कुछ माह पूर्व वार्ड क्रमांक 18, सरदार पटेल वार्ड में स्थित राज्य संरक्षित स्मारक सिंधीपुरा गेट के मूल स्वरूप में कथित रूप से परिवर्तन करते हुए वहां पूर्व से किया गया गुलाबी (गेरुआ) रंग हटाकर केसरिया रंग कर दिया गया।
संविधान सुरक्षा समिति, बुरहानपुर के जिला अध्यक्ष एडवोकेट जहीर उद्दीन शेख ने इसे पुरातात्विक स्मारक के मूल स्वरूप में हस्तक्षेप बताते हुए पूरे मामले की जांच कराने तथा संबंधित कानून एवं पुरातत्व विभाग के नियमों के तहत कार्रवाई करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्मारकों का संरक्षण केवल वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखना भी हमारा दायित्व है। ऐसे में संरक्षित स्मारकों के स्वरूप अथवा निर्धारित रंग में बिना अनुमति परिवर्तन किया जाना गंभीर विषय है।
अन्य पांच ऐतिहासिक द्वारों को लेकर भी जताई चिंता
समिति अध्यक्ष अधिवक्ता जहीर उद्दीन शेख ने प्रशासन को आगाह करते हुए कहा कि यदि सिंधीपुरा गेट के मामले में समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो शहर के अन्य पांच ऐतिहासिक द्वारों को लेकर भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि स्थानीय स्तर पर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों या अन्य लोगों द्वारा अपनी इच्छा के अनुसार संरक्षित स्मारकों के रंग अथवा स्वरूप में बदलाव किए जाने लगे, तो इससे शहर की ऐतिहासिक पहचान और पुरातात्विक धरोहरों के मूल स्वरूप को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए राज्य संरक्षित स्मारकों में किसी भी प्रकार के अनधिकृत बदलाव को रोकना आवश्यक है।
अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
संविधान सुरक्षा समिति, जिला बुरहानपुर के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जहीर उद्दीन शेख ने कलेक्टर बुरहानपुर, पुरातत्व विभाग के प्रभारी अधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की जांच कराने, सिंधीपुरा गेट के मूल स्वरूप को बहाल कराने तथा नगर निगम आयुक्त एवं संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायत में प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष संबंधी कानूनों के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने की मांग भी की गई है।
संविधान सुरक्षा समिति ने जिला प्रशासन से बुरहानपुर के सभी राज्य संरक्षित ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी भी ऐतिहासिक धरोहर के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ न हो और शहर की सदियों पुरानी ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रह सके।

