नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

मोदी सरकार ने जंतर मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को निर्दयता से कुचलकर देशभर की जनता के मन में बीजेपी – RSS को लेकर दबे जनाक्रोश को रास्ता दे दिया है। कश्मीर से कन्याकुमारी , मुंबई से ईटानगर देश के हर जिले ब्लॉक कस्बों और गांव देहात से जनता धीरे धीरे अब सड़को पर उतर रही है। सोनम वांगचुक के समर्थन में जलगांव में ज्ञापन-याचन , चेतावनी जैसे लोकतांत्रिक तरीकों से सरकार को लोकलाज की याद दिलाई गई। जामनेर में महाविकास आघाड़ी ने मूक मोर्चा निकाला।

शिवसेना के प्रकाश पाटिल , कांग्रेस के रफ़ीक मौलाना , एनसीपी के गोपाल राजपूत , जावेद मुल्लाजी समेत सचिन बोरसे , अविनाश बोरसे , आकाश बंडे ने मोदी सरकार को मुखरता से सवाल पूछे। भुसावल में सर्व समावेशक विरोध प्रदर्शन किया गया। वंचित बहुजन आघाड़ी की ओर से आयोजित महाराष्ट्र बंद के लिए अपील की गई। पहुर में विजय मोरे ने छात्रों के समर्थन में धरना दिया जिसमें वंचित बहुजन आघाड़ी के राहुल इंगले ने शिरकत करी। मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाला मॉडल से प्रेरणा लेकर किए गए NEET पेपर लीक कांड पर मोदी सरकार हमेशा के लिए पर्दा डालना चाहती है।
Gen G से दूर भाग रहे मंत्री :
सोशल मीडिया पर उत्तर भारत से आंदोलन के दौरान आ रही नेताओ के पिटाई की खबरों से बौखलाए हुए बीजेपी शासित राज्यों के तमाम मंत्री जनता के बीच से ग़ायब हो चुके हैं। राहुल गांधी के विरोध में धरना दे कर बीजेपी ने सेल्फ गोल कर लिया है। बीजेपी के संकट मोचक छाप नेता लोगों से डरे हुए हैं। महाराष्ट्र में खुद देवेन्द्र फड़नवीस और उनके कलीग अपने बयानो से आंदोलन के बारे में भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे है।
विदित हो कि महाराष्ट्र में 2019 के बाद शिवसेना NCP में टूट का कारण बताए जा रहे देवेन्द्र फड़नवीस को लेकर जनता में गुस्सा है। देवेन्द्र फड़नवीस राहुल गांधी को संसद में बहस की अपील कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कई बार देखा गया है कि जब विपक्ष चर्चा चाहता है तब नरेन्द्र मोदी संसद से भागकर विदेश दौरों पर निकल जाते है।

