थांदला में संत-सतियों का मंगल प्रवेश, सास ने तपस्वियों के पारणे कराकर मनाई बेटा-बहू की वैवाहिक वर्षगांठ | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

थांदला में संत-सतियों का मंगल प्रवेश, सास ने तपस्वियों के पारणे कराकर मनाई बेटा-बहू की वैवाहिक वर्षगांठ | New India Times

जिन शासन के संत-सतियों के चातुर्मास को लेकर इन दिनों संत-सतियों का विहार जारी है। इसी क्रम में पूज्य श्री धर्मदासगण के प्रवर्तक बुद्धपुत्र पूज्य गुरुदेव श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. आदि ठाणा वर्षावास के लिए विभिन्न क्षेत्रों की स्पर्शना करते हुए विहाररत हैं। उनके आज्ञानुवर्ती संत-सतियां भी घोषित वर्षावास स्थलों की ओर विहार कर रही हैं।

थांदला में संत-सतियों का मंगल प्रवेश, सास ने तपस्वियों के पारणे कराकर मनाई बेटा-बहू की वैवाहिक वर्षगांठ | New India Times
थांदला में संत-सतियों का मंगल प्रवेश, सास ने तपस्वियों के पारणे कराकर मनाई बेटा-बहू की वैवाहिक वर्षगांठ | New India Times

इसी कड़ी में पुण्यपुंज पूज्य श्री पुण्यशीलाजी म.सा. के संघ की विदुषी महासती पूज्या श्री सुव्रताश्रीजी म.सा. एवं मधुर गायिका पूज्या श्री किरणबालाजी म.सा. आदि ठाणा-6 का थांदला में मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में पूज्या श्री सुव्रताश्रीजी म.सा. ने कहा कि आत्मा कहाँ से आई है और कहाँ जाने वाली है, इसकी चिंता आज किसी को नहीं है। मनुष्य ने देह और आत्मा को एक मानकर केवल देह के राग का पोषण किया है, जिससे आत्मा की अनंत शक्तियाँ छिप गई हैं।

उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति अपनी पसंद-नापसंद में ही उलझा हुआ है। जब परिस्थितियाँ उसके मन के विपरीत होती हैं तो वह दुखी हो जाता है। ईर्ष्या और भौतिक सुखों की लालसा ने मनुष्य को अशांत बना दिया है। यदि वह कर्मशक्ति को पहचान ले तो जीवन के अनेक दुखों से मुक्त हो सकता है।

देह-सुख की आसक्ति पर प्रकाश डालते हुए पूज्याश्री ने कहा कि पहले भैंस पानी में पड़ी रहती थी, लेकिन आज इंसान ही घंटों पानी में रहने लगा है। वैज्ञानिक युग में जहाँ बेकार वस्तु को उपयोगी बनाया जा रहा है, वहीं यह शरीर अंततः नश्वर है। इसलिए मनुष्य को देह के बजाय आत्मकल्याण और मोक्ष के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए।

धर्मसभा में पूज्या श्री प्रणिधिश्रीजी म.सा. ने कहा कि भगवान ने भगवान बनने का मार्ग सम्यक दर्शन और सम्यक आचरण के माध्यम से बताया है। यदि मनुष्य संवेग, निर्वेद और सम्यक आचरण को जीवन में नहीं अपनाता, तो उसकी आस्था पूर्ण नहीं मानी जा सकती। उन्होंने कहा कि संसार के सभी भोग क्षणिक हैं, जबकि मोक्ष का सुख ही शाश्वत और अविनाशी है।

धर्मसभा का संचालन संघ सचिव हितेश शाह ने किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से पूज्य संत-सतियों के सान्निध्य में अधिक से अधिक धर्म आराधना करने का आह्वान किया।

युवाओं ने लिया विहार सेवा का लाभ

मेघनगर के अगराल से लगभग 9 किलोमीटर के उग्र विहार में पूज्याश्री के थांदला मंगल प्रवेश के दौरान पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. के निर्देश पर पूज्या श्री प्रियशीलाजी म.सा. एवं पूज्या श्री दीप्तिश्रीजी म.सा. भी अगवानी के लिए पहुँचीं। श्रीसंघ थांदला के प्रफुल तलेरा, प्रिया तलेरा सहित नवयुवक मंडल के अर्पित मेहता तथा बाल एवं बालिका मंडल के सदस्यों ने विहार सेवा का लाभ प्राप्त किया।

तपस्वियों के पारणे कराकर मनाई वैवाहिक वर्षगांठ

तप प्रधान जिन शासन की परंपरा के अनुसार थांदला में लगभग 90 वर्षीतप आराधकों के सामूहिक पारणे स्थानीय महावीर भवन में श्रीसंघ थांदला द्वारा कराए जा रहे हैं। इस अवसर पर कई परिवार अपने विशेष अवसरों को तपस्वियों की सेवा के साथ मना रहे हैं। इसी क्रम में एकासन तपधारी सुश्राविका श्रीमती प्रेमलता लोढ़ा ने अपने पुत्र जिनेन्द्र लोढ़ा एवं पुत्रवधू प्रतिभा लोढ़ा की 35वीं वैवाहिक वर्षगांठ तपस्वियों के पारणे कराकर मनाई। वहीं तपस्वी शीला पीचा ने अपने पुत्र कपिल पीचा एवं पुत्रवधू सरिता पीचा की 24वीं वैवाहिक वर्षगांठ पर तपस्वियों की सेवा कर परिवार की एकता और धर्म प्रभावना का प्रेरक संदेश दिया।

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