नन्दचक्र तपस्वियों के अट्ठाई तप के पारणें पर निकली जयकार यात्रा, गगनभेदी जयकारों से गूंजा थांदला | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

नन्दचक्र तपस्वियों के अट्ठाई तप के पारणें पर निकली जयकार यात्रा, गगनभेदी जयकारों से गूंजा थांदला | New India Times

आध्यात्मिक क्षेत्र में थांदला का नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित है। इसका प्रमुख कारण यहां जन्मे संतों द्वारा आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होकर जिन शासन की प्रभावना करना है। जैनाचार्य पूज्य श्री जवाहरलालजी म.सा. एवं गुरुदेव पूज्य श्री उमेशमुनिजी म.सा. की गुरु परंपरा को रुनवाल परिवार के कुलदीपक खूब आगे बढ़ा रहे हैं।

नन्दचक्र तपस्वियों के अट्ठाई तप के पारणें पर निकली जयकार यात्रा, गगनभेदी जयकारों से गूंजा थांदला | New India Times

इन्हीं की प्रेरणा से धर्मोत्कर्ष तत्वज्ञ वर्षावास में इस वर्ष पहली बार नन्दचक्र की उत्कृष्ट आराधना में 40 तपस्वी जुड़े हैं और उन्होंने इतिहास रच दिया है। इनमें से 31 तपस्वी उपवास के माध्यम से नन्दचक्र की आराधना करते हुए लड़ी के शिखर स्वरूप अट्ठाई तप को पूर्ण कर चुके हैं। इनके पारणें आज थांदला श्रीसंघ द्वारा स्थानीय महावीर भवन में आयोजित किए गए।

पारणें से पहले स्थानक भवन में पूज्य तत्वज्ञश्री ने सभी आराधकों को दर्शन-वंदन का लाभ देते हुए मांगलिक फरमाई। इसके बाद पौषध भवन से महावीर भवन तक संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया एवं सचिव हितेश शाहजी के नेतृत्व में जयकार यात्रा निकाली गई। इसमें 88 वर्षीय तप आराधक भी शामिल हुए।

जयकार यात्रा के दौरान एवं सभी आराधकों के पारणें करवाते समय श्रीसंघ और नवयुवक मंडल के पदाधिकारियों ने नन्दचक्र तपस्वियों एवं गुरुदेव के गगनभेदी जयकारों से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर वर्षीतप आराधकों के पारणें का लाभ स्व. सुंदरलाल भंसाली परिवार ने लिया, जबकि नन्दचक्र आराधकों के पारणें संघ द्वारा करवाए गए।

भंसाली परिवार एवं बहन-बेटी परिवार द्वारा सभी आराधकों को प्रभावना प्रदान कर उनका बहुमान किया गया। श्रीसंघ एवं धर्मोत्कर्ष परिवार की ओर से भी नन्दचक्र तपस्वियों का बहुमान किया गया।

किशोरावस्था से लेकर प्रौढ़ तपस्वियों ने की आराधना

संघ प्रवक्ता पवन नाहर ने जानकारी देते हुए बताया कि नन्दचक्र आराधना में विगत 22 वर्षों से वर्षीतप की दीर्घ आराधना कर रहे पूज्य श्री धर्मदास गण प्रवर्तक भरत भंसाली, वरिष्ठ श्रावक सुजानमल एवं रजनीकांत शाहजी, संजय व्होरा और दिनेश डोसी भी जुड़े हैं।

युवा तपस्वियों के रूप में कु. नेन्सी शाहजी, कु. भूमिका रुनवाल, विशेष तलेरा, शंखेष नाहटा, मनन चौधरी, अंशुल लोढ़ा, अंकुर शाहजी एवं हितेश पावेचा तपस्या से जुड़े हैं। पूर्वा मयंक श्रीश्रीमाल एवं स्मिता चिराग पीचा भी नन्दचक्र की दीर्घ तपस्या कर रहे हैं।

इसी तरह श्राविका वर्ग में किरण छाजेड़, उषा व्होरा, रुचि शाहजी, पूजा मुकेश श्रीश्रीमाल, नीता श्रीश्रीमाल, अंतिम श्रीमाल, सीमा बरमेचा, श्रद्धा घोड़ावत, पिंकी पावेचा, निकिता पीचा, नेहा सिसोदिया, खुशबू व्होरा एवं नीता भंडारी नन्दचक्र की उग्र आराधना कर रही हैं। करीब 10 आराधक निवि एवं एकासन तप के माध्यम से भी नन्दचक्र की आराधना कर रहे हैं।

ऐसे किया जाता है नन्दचक्र

थांदला में बुद्धपुत्र प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी के आज्ञानुवर्ती तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी, रोचक वक्ता पूज्य श्री संदीपमुनिजी आदि ठाणा-8 एवं सरलमना पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा-4 के सानिध्य में अनेक तपस्वी कठिन आराधना कर रहे हैं।

दीर्घ तपस्वी प्रवीणा सेठिया, प्रदीप व्होरा, प्रेरणा व्होरा, आयुषी व्होरा, रवि गादिया, आरती श्रीश्रीमाल, मा. श्रेयांश लोढ़ा (16 वर्ष), माधुरी छाजेड़, दीपा शाहजी, पूजा तलेरा, अर्पित मेहता, मेघा बाठिया, नेहा तलेरा एवं कु. रिया तलेरा सहित 14 तपस्वी दृढ़ मनोबल के साथ मासक्षमण की दीर्घ आराधना की ओर आगे बढ़ रहे हैं। वहीं मंगलेश श्रीश्रीमाल, स्वीटी गादिया, शकुंतला कांकरिया एवं सपना रुनवाल श्रेणितप की कठिन तपस्या कर रहे हैं।

संघ में पहली बार हो रही नन्दचक्र आराधना के विषय में तत्वज्ञश्री ने बताया कि तप आत्मा से कर्मों को हटाने की उत्कृष्ट साधना है, जिसे साधक विभिन्न रूपों में करता आया है। तप करने की लगन एवं जिज्ञासा को ध्यान में रखते हुए नन्दचक्र की परिकल्पना की गई है।

इसमें साधक प्रथम लड़ी में क्रमशः एक उपवास-पारणा, दो उपवास-पारणा और चार उपवास-पारणा करते हुए आठ उपवास के शिखर पर पहुंचता है। इसके बाद पारणा कर क्रमशः उल्टे क्रम में चार उपवास-पारणा, दो उपवास-पारणा एवं एक उपवास-पारणा करते हुए अपना तप पूर्ण करता है।

एक परिपाटी में 22 दिन की तपस्या एवं 7 दिन के पारणें होते हैं। इस प्रकार 29 दिनों में तपस्या पूर्ण होती है। पूज्य श्री की प्रेरणा से पहली बार ही सकल संघ में 40 आराधकों द्वारा नन्दचक्र की आराधना की जा रही है, जिसकी चर्चा सकल मालवा, निमाड़ एवं डूंगरप्रांत में हो रही है।

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