पीएम आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा: सतना समेत 42 जिलों में 708 हितग्राहियों ने लिया दोहरा लाभ | New India Times

मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:

प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य बेघर एवं कच्चे मकानों में रहने वाले गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन मध्यप्रदेश में इस महत्वाकांक्षी योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार प्रदेश के 708 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) दोनों का लाभ मिल चुका है। इनमें सतना जिले के 12 मामले भी शामिल हैं, जहां लाभार्थियों ने शहर और गांव दोनों स्थानों पर आवास प्राप्त कर लिया तथा दोनों योजनाओं की पूरी राशि भी हासिल कर ली।

यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब जिले में अनेक पात्र परिवार वर्षों से आवास योजना के लाभ के लिए भटक रहे हैं। एक ओर जरूरतमंद परिवार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों को दो-दो आवासों का लाभ मिलने से योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

लाभार्थियों के डेटा के मिलान में सतना जिले के 12 ऐसे हितग्राही चिन्हित किए गए हैं जिन्होंने दोनों योजनाओं का लाभ प्राप्त किया। इनमें से 9 लाभार्थियों के दोनों आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा उन्हें दोनों योजनाओं की पूरी राशि जारी की जा चुकी है। एक हितग्राही का ग्रामीण आवास पूर्ण है जबकि शहरी आवास निर्माणाधीन है। वहीं दो हितग्राहियों के शहरी आवास पूर्ण हैं और ग्रामीण आवास निर्माण की प्रक्रिया में हैं। इससे स्पष्ट होता है कि लाभार्थी चयन एवं सत्यापन प्रक्रिया में गंभीर खामियां रही हैं।

सतना नगर निगम के नजीराबाद वार्ड क्रमांक 38 में भी एक कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक आर्थिक रूप से संपन्न एवं अपात्र व्यक्ति को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्रदान किया गया। मामले की जानकारी मिलने पर एक जागरूक नागरिक द्वारा 4 मार्च 2025 को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगी गई, लेकिन जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद प्रथम अपील दायर की गई, जिस पर अपीलीय अधिकारी ने 20 अप्रैल 2025 को जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, फिर भी सूचना नहीं दी गई। बाद में 5 फरवरी 2026 को पुनः आवेदन किया गया, लेकिन जानकारी नहीं मिलने पर राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की गई, जो वर्तमान में लंबित है। आवेदक का कहना है कि मामले की जांच के लिए ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई जाएगी।

जिले में सामने आए मामलों में जनपद पंचायत नागौद की ग्राम पंचायत अमिलिया निवासी अमृतलाल साहू का नाम भी शामिल है। उन्हें 27 दिसंबर 2017 को पीएम आवास शहरी योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था, जबकि बाद में 4 जनवरी 2022 को पीएम आवास ग्रामीण योजना के तहत भी आवास स्वीकृत कर दिया गया। रिकॉर्ड के अनुसार दोनों आवास पूर्ण हो चुके हैं और दोनों योजनाओं की राशि जारी की जा चुकी है।

इसी प्रकार जनपद पंचायत रामपुर बाघेलान की ग्राम पंचायत सगौनी निवासी शेषमणि पांडेय को 20 फरवरी 2017 को पीएम आवास शहरी योजना का लाभ मिला, जबकि बाद में उन्हें पीएम आवास ग्रामीण योजना के तहत भी आवास स्वीकृत कर दिया गया। दोनों योजनाओं में निर्माण पूर्ण होने और भुगतान जारी होने का उल्लेख रिकॉर्ड में दर्ज है।

मैहर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत नादन निवासी हीरामणि को भी पहले पीएम आवास शहरी योजना और बाद में पीएम आवास ग्रामीण योजना का लाभ दिया गया। दोनों आवासों का निर्माण पूर्ण होने और भुगतान जारी होने की जानकारी रिकॉर्ड में दर्ज है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दोनों योजनाओं में आधार नंबर, बैंक खाते, मोबाइल नंबर और पात्रता सत्यापन की बहुस्तरीय व्यवस्था लागू है, तब एक ही व्यक्ति को दो अलग-अलग योजनाओं में पात्र कैसे घोषित किया गया। यदि आधार आधारित सत्यापन प्रभावी ढंग से लागू था, तो दोहरी स्वीकृति संभव नहीं होनी चाहिए थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में या तो लाभार्थियों द्वारा जानकारी छिपाई गई या फिर स्थानीय स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही अथवा मिलीभगत हुई है।

यह अनियमितता केवल सतना जिले तक सीमित नहीं है। प्रदेश के लगभग 42 जिलों में 708 दोहरे लाभार्थी चिन्हित किए गए हैं। सबसे अधिक मामले इंदौर (89), सागर (68), धार (64), जबलपुर (47) और विदिशा (42) जिलों में सामने आए हैं। अब इन मामलों की जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा अपात्र लाभार्थियों से राशि की वसूली की मांग तेज हो गई है।

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