WCL उकणी खदान कोयला घोटाला: करोड़ों के गोरखधंधे में बड़े अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका, CBI जांच की उठी मांग | New India Times

मक़सूद अली, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

WCL उकणी खदान कोयला घोटाला: करोड़ों के गोरखधंधे में बड़े अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका, CBI जांच की उठी मांग | New India Times

वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) की उकणी कोयला खदान से उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद कोयलांचल में हड़कंप मच गया है। हालांकि प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कुछ कर्मचारियों को निलंबित किया है, लेकिन इंटक नेता आबीद हुसेन ने इस पूरे प्रकरण को महज एक ‘सिरा’ बताते हुए उच्च स्तरीय CBI जांच की मांग की है।

WCL उकणी खदान कोयला घोटाला: करोड़ों के गोरखधंधे में बड़े अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका, CBI जांच की उठी मांग | New India Times

क्या है पूरा मामला?

20 अप्रैल 2026 की रात, कृष्णा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. का ट्रक (MH 40 CD 7675) उकणी खदान से उच्च श्रेणी का कोयला लेकर वणी रेलवे साइडिंग के लिए निकला था। सामान्यतः यह दूरी 1.5 से 2 घंटे में तय होती है, लेकिन ट्रक 4 घंटे बाद पहुंचा। जब साइडिंग पर माल खाली किया गया, तो उसमें कोयले के बजाय मिट्टी और गिट्टी निकली। इस खुलासे के बाद WCL प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है।

WCL उकणी खदान कोयला घोटाला: करोड़ों के गोरखधंधे में बड़े अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका, CBI जांच की उठी मांग | New India Times

कार्रवाई और मिलीभगत के गंभीर आरोप

WCL प्रशासन ने सुरक्षा प्रमुख रशीद अहमद और डंपमैन प्रसाद पिंपळशेंडे को निलंबित कर दिया है, जबकि अन्य कर्मचारियों को नोटिस थमाया गया है। लेकिन स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यह कार्रवाई केवल ‘छोटे मोहरों’ पर हुई है, जबकि असली मास्टरमाइंड पर्दे के पीछे हैं।

आबीद हुसेन और कामगारों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप:

GPS सिस्टम की भूमिका:

आरोपों के अनुसार, ट्रक जब वणी साइडिंग के बजाय ‘लालपुलिया’ की ओर जा रहा था, तब GPS कंट्रोल रूम के अधिकारियों को इसकी लोकेशन मिल रही थी। सवाल यह है कि जीपीएस अधिकारियों ने तुरंत महाप्रबंधक (GM) को इसकी सूचना क्यों नहीं दी? क्या वे जानबूझकर इस गोरखधंधे को चलने दे रहे थे?

संगठित सिंडिकेट:

आरोप है कि इसमें एक विशेष बेल्ट ऑपरेटर, डंपमैन और कुछ सुरक्षा गार्डों का संगठित नेटवर्क है। इस बेल्ट ऑपरेटर के बारे में कहा जा रहा है कि उसने राजनीतिक पहुंच का उपयोग कर खुद की बदली घोंसा खदान से वणी रेलवे साइडिंग करवाई थी।

राजकीय संरक्षण:

चर्चाओं के अनुसार, इस पूरे खेल में कुछ स्थानीय राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और प्रभावशाली नेताओं का हाथ है, जो ट्रांसपोर्टर के सुपरवाइजर के साथ मिलकर कोयला चोरी को अंजाम दे रहे थे।

लेनदेन का खेल:

कामगारों का दावा है कि यह अवैध काम कई महीनों से चल रहा है। यदि इन कर्मचारियों की कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाली जाए, तो कोयला चोरी में लिप्त सफेदपोशों और संबंधित अधिकारियों के नाम सामने आ सकते हैं।

इंटक की दो टूक: ‘हो CBI जांच’

इंटक नेता आबीद हुसेन ने आरोप लगाया कि पूर्व सब-एरिया मैनेजर से लेकर जीपीएस विभाग के वर्तमान अधिकारियों तक, सभी इस भ्रष्टाचार में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित जांच की गई, तो यह एक बड़ा धोखा होगा। उन्होंने मांग की है कि:

1. CBI जांच:

इस संगठित नेटवर्क को बेनकाब करने के लिए स्वतंत्र केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराई जाए।

2. पुलिस पीसीआर:

पुलिस को निलंबित कर्मचारियों का पीसीआर (पुलिस कस्टडी रिमांड) लेकर पूछताछ करनी चाहिए ताकि ‘लालपुलिया’ के उस गुप्त काँटे (वजन केंद्र) का पता चले, जहाँ से यह कोयला हेराफेरी की जाती थी।

3. सख्त कार्रवाई:

इस गिरोह में शामिल राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों और संबंधित अधिकारियों की संपत्ति की जांच हो।
यह घटना न केवल सरकार को राजस्व का चूना लगा रही है, बल्कि उद्योगों को निम्न गुणवत्ता का कोयला सप्लाई कर उत्पादन को भी बाधित कर रही है। अब देखना यह है कि WCL प्रबंधन इस पर क्या ठोस कदम उठाता है।

वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) की उकणी खदान से कोयला हेराफेरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में सामने आई ताजा जानकारी यह है कि 20 अप्रैल की घटना कोई पहली बार नहीं है, बल्कि 23 फरवरी 2026 को भी ऐसी ही चोरी हुई थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या वेकोली प्रशासन की ‘सुस्त’ कार्रवाई ने ही कोयला माफियाओं को हौसले दिए हैं?

23 फरवरी की ‘ढिलाई’ ने खोली पोल
स्थानीय सूत्रों और कामगारों के अनुसार, 23 फरवरी 2026 को भी कोयला चोरी करते हुए दो ट्रक पकड़े गए थे। तब वेकोली प्रबंधन ने पुलिस शिकायत दर्ज करने में पूरे 48 घंटे की देरी की थी।

साजिश का शक: कामगारों का आरोप है कि 48 घंटे का लंबा अंतराल जानबूझकर दिया गया था ताकि आरोपी ड्राइवर पुलिस की गिरफ्त से भाग सकें। क्या वेकोली के किसी अधिकारी ने ड्राइवर को भगाने में मदद की? यह एक बड़ा और गंभीर सवाल है।

बदलती कार्यशैली:

अगर उसी समय 23 फरवरी को ही WCL ने आज की तरह तत्काल ‘जांच समिति’ गठित की होती, तो शायद 20 अप्रैल की यह बड़ी हेराफेरी रोकी जा सकती थी।

ब्लैकलिस्टिंग पर सवाल: कंपनी के मालिक पर मेहरबानी क्यों?
वेकोली प्रशासन ने ‘में. कृष्णा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि.’ को एक वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। लेकिन, सबसे बड़ा

सवाल यह है कि: पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बावजूद, आज तक इस निजी कंपनी के मालिक को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?  क्या केवल एक साल की ब्लैकलिस्टिंग ही काफी है, जबकि यह स्पष्ट है कि यह मामला संगठित नेटवर्क और बड़े वित्तीय घोटाले का है?

सुरक्षा तंत्र पर संदेह:
‘लालपुलिया’ का वह गुप्त काँटा कहाँ है?
आबीद हुसेन और यूनियन नेताओं का कहना है कि कोयले की हेराफेरी का यह खेल वणी रेलवे साइडिंग तक पहुंचने से पहले रास्ते में ही होता है।

GPS की भूमिका:
जब 23 फरवरी और 20 अप्रैल दोनों घटनाओं में GPS लोकेशन से यह स्पष्ट था कि ट्रक रेलवे साइडिंग पर न जाकर ‘लालपुलिया’ की ओर जा रहे थे, तो GPS विभाग के अधिकारियों ने उस वक्त पुलिस को सूचित क्यों नहीं किया?

सीबीआई जांच की मांग:
पुलिस कस्टडी रिमांड (PCR) की मांग इसलिए की जा रही है ताकि उस गुप्त वजन केंद्र (काँटा) का पता चले जहाँ उकणी का उच्च गुणवत्ता वाला कोयला उतारकर मिट्टी-गिट्टी भरी जाती है।

प्रमुख मांगे:

मालिक की गिरफ्तारी: कोयला चोरी में लिप्त ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।

सख्त जांच: 23 फरवरी और 20 अप्रैल की घटनाओं के बीच के संबंधों की जांच हो और यह पता लगाया जाए कि क्या इसमें शामिल अधिकारी और कर्मचारी एक ही हैं।

संपत्ति की जांच: इस गोरखधंधे से अर्जित की गई बेहिसाब दौलत और उसमें लिप्त राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों की संपत्ति की जांच की जाए।

कोयलांचल में अब यह चर्चा आम है कि वेकोली का सुरक्षा तंत्र क्या वाकई ‘मजबूत’ है, या फिर यह पूरी तरह से माफियाओं की जेब में है? क्या WCL प्रशासन अब भी केवल कागजी जांच समिति तक सीमित रहेगा, या वाकई में बड़े चेहरों को बेनकाब करेगा?

By nit

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