सद्दाम हुसैन, लखनऊ, NIT;

यह विडंबना ही है कि प्रदेश की राजधानी में ही गोरखधंधा करने वाले फलफूल रहे हैं। जिम्मेदारों का लचर रवैया इन्हें और बढ़ावा दे रहा है जिसका खामियाजा भुगत रहे हैं आम लोग।
ग्रामीण इलाके ही नहीं अब तो शहरी इलाकों में भी झोलाछाप बंगाली तो कहीं खानदानी दवाखाना चला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की नींद तब टूटती है, जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है। सीएमओ ने इनके खिलाफ जांच का जिम्मा सीएचसी के प्रभाविरों को देते हैं, पर आज तक किसी ने भी रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नहीं भेजी। जिम्मेदारों पर कार्रवाई के बजाय सीएमओ ऑफिस भी सिर्फ इन्हें रिमांडर भेजकर ही चुप बैठा है। राजधानी में किस तरह से झोलाछाप मनमानी दवाखाना चला रहे हैं यह किसी से छिपा नहीं है।
