इदरीस मंसूरी, ब्यूरो चीफ, गुना (मप्र), NIT:

गुना जिले की आरोन तहसील में सरकारी घोषित हो चुकी भूमि की अवैध रजिस्ट्री का मामला सामने आया है। इस मामले में एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी की भूमिका पर संदेह जताते हुए कलेक्टर से जांच कराने की मांग की गई है।

आरोप है कि वर्तमान एसडीएम द्वारा पूर्व एसडीएम के आदेश में बदलाव कर दिए गए, जिसके बाद उक्त भूमि की रजिस्ट्री 11 लोगों के नाम कर दी गई। यह मामला सर्वे नंबर 1191 (रकबा 0.418 हेक्टेयर) की सरकारी भूमि से जुड़ा है।
ग्राम बरौद निवासी एवं पूर्व सांसद प्रतिनिधि घनश्याम सिंह रघुवंशी पुत्र दीवान सिंह रघुवंशी ने कलेक्टर को शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि पटवारी और तहसीलदार स्तर पर साजिश रचकर सरकारी भूमि का अवैध पंजीकरण कराया गया। शिकायत में वर्तमान एसडीएम महेश कुमार बमनहा, तहसीलदार धीरेंद्र गुप्ता एवं हल्का नंबर 22 के पटवारी कल्याण सिंह की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 1977-78 में प्रकरण क्रमांक 12 ए-19/77-78 के अंतर्गत मिश्री पुत्र मंगलिया आदिवासी निवासी बेहटा झिर, तहसील गुना को सर्वे नंबर 1191 सहित अन्य खसरों की भूमि आवंटित की गई थी। यह आवंटन नियमों के विरुद्ध था, क्योंकि शहरी आवासीय भूमि को कृषि भूमि दर्शाकर सामूहिक रूप से वितरित किया गया।
राधौगढ़ के तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी ने अपील प्रकरण क्रमांक 59/अपील/79-80 (दिनांक 24 अप्रैल 1981) एवं 24/अपील/1978-79 (दिनांक 21 जून 1979) में उक्त आवंटन निरस्त कर दिया था। इन आदेशों में सर्वे नंबर 1191 (0.418 हेक्टेयर) भी शामिल था। इसके बावजूद संबंधित पटवारी द्वारा आदेशों का जानबूझकर पालन नहीं किया गया।
लगातार शिकायतों के बाद तत्कालीन आरोन एसडीएम विकास कुमार आनंद ने दिनांक 7 अगस्त 2024 को प्रकरण क्रमांक 133/अपील/2021-22 में आदेश पारित करते हुए मिश्री पुत्र मंगलिया को किया गया पट्टा निरस्त माना।
पट्टा निरस्त होने के बावजूद हुई रजिस्ट्री
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पट्टा निरस्त होने के बावजूद मिश्री के पुत्र मंगलय एवं बृजेश पुत्र रघुवीर सिंह ने साजिश के तहत अपने नौकर समरू पुत्र आमना आदिवासी के नाम पर भूमि की रजिस्ट्री कराई। इसके बाद गलत तथ्यों के आधार पर अनुमति प्राप्त कर समरू द्वारा शांतिबाई पत्नी रघुवीर सिंह रघुवंशी के नाम रजिस्ट्री कर दी गई।
आगे बताया गया कि 28 अगस्त 2025 को एसडीएम न्यायालय में प्रविष्टि सुधार का आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें तकनीकी त्रुटि का हवाला देकर शांतिबाई का नाम जोड़ने की मांग की गई। एसडीएम द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने पर तहसीलदार और पटवारी ने तथ्य जानते हुए भी गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की।
पटवारी द्वारा पहले शांतिबाई का नाम हटाकर भूमि को सरकारी घोषित किया गया, लेकिन बाद में अपनी आईडी से पुनः शांतिबाई का नाम दर्ज कर दिया गया। आरोप है कि पटवारी कल्याण सिंह ने शांतिबाई से संपर्क कर गलत तरीके से प्रविष्टि सुधार का आवेदन करवाया, जिसके बाद शांतिबाई ने सर्वे नंबर 1191 की 0.418 हेक्टेयर भूमि के टुकड़े कर 11 अन्य व्यक्तियों को बेच दिया।
जांच समिति गठन की मांग
आवेदक ने कलेक्टर से मांग की है कि
• स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए
• सर्वे नंबर 1191 को पूर्णतः सरकारी भूमि घोषित कर अभिलेखों में सुधार किया जाए
• 11 अवैध रजिस्ट्रियों को निरस्त किया जाए
• दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए
मामले की शिकायत कलेक्टर के साथ-साथ सीएम हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराई गई है।
