शब-ए-बारात से पहले भोपाल के कब्रिस्तानों की व्यवस्थाएं सुधारने की उठ रही है मांग | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

शब-ए-बारात से पहले भोपाल के कब्रिस्तानों की व्यवस्थाएं सुधारने की उठ रही है मांग | New India Times

शब-ए-बारात से पूर्व शहर के सभी कब्रिस्तानों एवं मक़बरों में स्थायी व्यवस्थाएं दुरुस्त किए जाने की मांग की जा रही है।
आज 19 जनवरी 2026 को कोमी खिदमतगार टीम ने शहर के कई कब्रिस्तानों का निरीक्षण किया, जहां बदहाली और अतिक्रमण पर गहरी चिंता जताई। टीम ने छावनी कब्रिस्तान, बड़ा बाग, मुल्कन बी, गंजशहीदा, भदभदा, हलालपुरा, गेहूं खेड़ा, कोलार, करोद, बरखेड़ा पठानी सहित कई कब्रिस्तानों की स्थिति का जायजा लिया। कई स्थानों पर कब्रिस्तान की जमीन पर झुग्गियां, पार्किंग और निजी कब्जे पाए गए हैं।

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हाजी इमरान हारून ने बताया कि शहर में कभी 200 से अधिक कब्रिस्तान थे, जो अब घटकर करीब 20 ही रह गए हैं, और उन पर भी अतिक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। कई ऐतिहासिक मक़बरे जैसे शाहजहां बेगम, दोस्त मोहम्मद खान, सिद्दीक हसन खान आदि अंधेरे में डूबे हैं, जहां बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है, जबकि शब-ए-बारात पर बड़ी संख्या में लोग फातेहा पढ़ने पहुंचते हैं।

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संगठन ने मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड, नगर निगम भोपाल और जनप्रतिनिधियों को पत्र भेजकर मांग की है कि शब-ए-बारात से पहले कब्रिस्तानों में बिजली, पानी, हाई मस्ट लाइट, सुरक्षा, बाउंड्री वॉल, शेड, बुजुर्गों के बैठने की व्यवस्था और रास्तों में ब्लॉक बिछाने जैसे स्थायी इंतजाम किए जाएं। साथ ही बंद पड़े कब्रिस्तानों में दोबारा दफन की प्रक्रिया शुरू कर उन्हें अतिक्रमण से मुक्त कराने की पहल करने की भी मांग की गई है।

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हाजी इमरान हारून ने कहा कि मुस्लिम समाज हर वर्ष अपने स्तर पर सफाई, रंग-रोगन और अस्थायी इंतजाम करता है, लेकिन कब्रिस्तानों की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी वक्फ बोर्ड और नगर निगम की भी है, जिस पर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

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उन्होंने बताया कि शब-ए-बारात की रात मुसलमान कब्रिस्तानों में जाकर अपने पूर्वजों के लिए दुआ-ए-मगफिरत करते हैं, मस्जिदों में इबादत, नफिल नमाज और कुरान पाक की तिलावत करते हैं तथा देश की खुशहाली, तरक्की और अमन-चैन के लिए विशेष दुआएं की जाती हैं। ऐसे में सभी कब्रिस्तानों में समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाना आवश्यक है।

कोमी खिदमतगार भोपाल ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी न होने की स्थिति में भी संगठन अपने स्तर पर सफाई अभियान चलाकर कब्रिस्तानों की स्थिति सुधारने का प्रयास करेगा, ताकि शब-ए-बारात के पवित्र अवसर पर लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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