इदरीस मंसूरी, ब्यूरो चीफ, गुना (मप्र), NIT:

आज स्थानीय अंबेडकर भवन में गांव बचाओ खेत बचाओ संघर्ष समिति द्वारा नागरिक कन्वेंशन का आयोजन किया गया। कन्वेंशन में शहर के प्रगतिशील लोग शामिल हुए। पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के तहत बीनागंज, चाचौड़ा तहसील के डूब क्षेत्र में आने वाले गांव के किसान भी उपस्थित थे। कन्वेंशन में मांग की गई कि पीकेसी लिंक परियोजना के तहत बनने वाले विशाल बांध की जगह छोटे-छोटे बांध बनाए जाएं, ताकि डूब क्षेत्र में आने वाले गांव और जमीन को डूबने से बचाया जा सके।

शहर के सामाजिक कार्यकर्ता राकेश मिश्रा ने कहा कि किसानों को गांव और जमीन से बेदखल कर बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाने वाला यह निर्णय सरकार को तुरंत वापस लेना चाहिए और किसान हितैषी नीतियों का निर्माण करना चाहिए। एडवोकेट डॉ. पुष्पराग शर्मा ने कहा कि प्रकृति ने जो सुविधाएँ मनुष्य के लिए उपलब्ध कराई हैं, उनसे छेड़छाड़ करना पूरे समाज के लिए हानिकारक है। बड़े-बड़े बांध बनाकर प्रकृति को नुकसान पहुंचाना और प्राकृतिक आपदाओं को न्योता देना समान है।
बीनागंज से आए प्रदुम्न मीणा ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल आंदोलन के जरिए ही संभव है। तमाम पार्टियां आज किसानों के हितों के नाम पर बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के फायदे के लिए नीतियां बना रही हैं। किसानों को अपनी ताकत संगठित करके आंदोलन करना होगा, तभी बांध बनाने की नीति को रद्द कराया जा सकता है।
किसान खेत मजदूर संगठन (AIKKMS) के राज्य सचिव मनीष श्रीवास्तव ने कहा, “किसानों को समझना होगा कि सत्ता पक्ष के लोग उन्हें आंदोलन से अलग करके भ्रमित करने में लगे हैं। इतिहास साक्षी है कि अनुनय-विनय, चुनाव या वोट से कभी हक और अधिकार नहीं मिले। आज जो हक और अधिकार नागरिकों के पास हैं, वे विभिन्न जन आंदोलनों के कारण ही हैं। ऐसे में किसानों को अपनी एकता बनाकर सरकार की किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ना चाहिए।”
सभी किसान भाइयों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई। कार्यक्रम का संचालन गांव बचाओ खेत बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य राधेश्याम चंदेल और विनोद मीणा ने किया और आभार अजय राव ने व्यक्त किया। कन्वेंशन में गुना शहर सहित विभिन्न गांवों के किसान शामिल हुए।

