नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र विधानसभा सत्रों के कामकाज के माध्यम से बीजेपी अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए गोदी मीडिया को प्रोपेगेंडा मटेरियल मुहैया करवा रही है। सुप्रीम कोर्ट की मेहरबानी से महाराष्ट्र में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था कि चुनाव प्रक्रिया शुरू है। सरकार ने नार पार गिरणा योजना के लिए 4 हजार 116 करोड़ रुपए का टेंडर निकालने का दावा किया है वही विदर्भ के 113 सिंचाई प्रोजेक्ट फंड के अभाव से रद्द करवा दिए गए है।

उत्तर महाराष्ट्र में 800 करोड़ की लागत वाली प्रकाशा बुराई लिफ्ट इरिगेशन योजना को सहाय प्राप्त योजना में शामिल करने के लिए मंत्री जयकुमार रावल केंद्र सरकार से गुहार लगा रहे है। विदर्भ के 11 जिलों की नदियों को आपस में जोड़ने वाली परियोजना का बजट 90 हजार करोड़ है। इस प्रोजेक्ट के सर्वे के नाम पर सरकारी तिज़ोरी से 400 करोड़ रिलीज़ कर गोदी मीडिया के लिए सपना बेचने की व्यवस्था कर दी गई है। दो हिस्सों में बंटे राज्य के जलसंपदा विभाग पर 13 हजार करोड़ का बकाया है।
मेरिट के आधार पर नेताओ को पोजीशन बहाल करने वाली देवेन्द्र फडणवीस सरकार का रिपोर्ट कार्ड दिल्ली की नज़र में फेल है। सरकार के ऊपर 09 लाख 54 हजार करोड़ रुपए का कर्जा चढ़ चुका है। सरकारी संरक्षण से वित्त पोषितो की प्रॉपर्टी उनके पार्टी को मिलने वाले चुनावी चंदे से सैकड़ों गुना ज्यादा है। निकाय चुनावों के प्रचार में बीजेपी नार पार के आड़ में अपने साथी दलों और विपक्ष से विरोध में आर पार की लड़ाई में रंग भर रही है। महाराष्ट्र की जनता देवेन्द्र फडणवीस सरकार से यह मांग कर रही है कि राज्य के वित्तीय हालत पर विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाकर उसका सीधा प्रसारण किया जाए।
लाइब्रेरी में जैसा था वैसा हि है :
श्री जैन ओसवाल भागीरथीबाई वाचनालय संस्था जामनेर में अध्यक्ष जगन लोखंडे , उपाध्यक्ष पारस ललवानी पर सरकार की निगरानी में लाया गया अविश्वास प्रस्ताव दो तिहाई बहुमत के अभाव से ख़ारिज हो गया है। पहले जो बॉडी कार्यरत थी वही अब भी बरकरार है। दुष्प्रचार के आधार पर किसी कथित मसीहा के महिमामंडन का बाजार गर्म है।
